Sunday, June 4, 2017

यात्री को सफर में परेशानी होने के कारण उसे मुआवजे के तौर पर 75 हजार रुपए

राज्य उपभोक्ता आयोग ने भारतीय रेलवे को निर्देश जारी करते हुए एक यात्री को सफर में परेशानी होने के कारण उसे मुआवजे के तौर पर 75 हजार रुपए देने की बात कही है। डिस्ट्रिक्ट फोरम के फैसले को सही ठहराते हुए दिल्ली स्टेट कंज्यूमर डिस्प्यूट रेडरेस्सल कमीशन ने भारतीय रेलवे से यह भी कहा है कि टिकट चेकर की तनख्वाह में से एक तिहाई पैसा काटा जाए, जिसने सही व्यक्ति की सीट पर दूसरे व्यक्तियों के बैठ जाने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की। आयोग ने कहा कि डिस्ट्रिक्ट फोरम द्वारा मुआवजे के तौर पर यात्री को 75 हजार रुपए देने की बात करना बिलकुल उचित है।
यह मामला साल 2013 का है। इस पूरे मामले की जानकारी देते हुए पीड़ित यात्री विजय कुमार ने कहा कि 30 मार्च को वह दक्षिण एक्सप्रेस में विशाखापटनम से नई दिल्ली के लिए सफर कर रहे थे लेकिन उनकी आरक्षित सीट को किसी अन्य व्यक्ति द्वारा कब्जा कर लिया गया। उपभोक्ता केंद्र में कुमार द्वारा की गई शिकायत में दावा किया गया है कि उनके घुटनों में दर्द है, जिसके कारण उन्होंने ट्रेन में सबसे नीचे वाली सीट बुक कराई थी। मध्य प्रदेश के बीना स्टेशन पर कुछ लोग जबरदस्ती उनके कंपारटमेंट में घुस गए और उनमें से एक व्यक्ति ने कुमार की सीट पर कब्जा कर लिया। जब वहां मौजूद यात्रियों ने इसका विरोध किया तो उन्होंने सभी यात्रियों के साथ बदसलूकी करना शुरु कर दिया।
इसके बाद कुमार ने टिकट चेकर और रेलवे के अन्य अधिकारियों से इस मामले की शिकायत करने की कोशिश की तो उन्हें कोई नहीं मिला। बाद में जब इस मामले के बारे में रेलवे को सूचना दी गई तो उन्होंने इसपर कुछ नहीं कहा और न ही अपनी गलती मानी, जिसके बाद डिस्ट्रिक्ट फोरम ने उन्हें निर्देश जारी कर यात्री को मुआवजा देने के लिए कहा था। वहीं कुमार ने इस मुआवजे को बढ़ाने के लिए सिफारिश की थी जिसे कंज्यूमर कोर्ट ने सुनवाई के दौरान मना कर दिया। इस केस की सुनवाई करते हुए जस्टिस वीणा बीरबल ने कहा कि यात्री को दिया जाने वाला मुआवजा काफी है और इसमें कोई भी इजाफा होना उचित नहीं है।

Saturday, May 27, 2017

सरस्वती हॉस्पिटल का पंजीयन निरस्त

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ग्वालियर डॉक्टर एस एस जादौन द्वारा सरस्वती हॉस्पिटल का पंजीयन निरस्त करने हेतु नोटिस जारी किया ।
#ग्राहक पंचायत
पहलवान सिंह निवासी चिनोर द्वारा कुछ माह पूर्व अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत ग्वालियर को शिकायत की गई थी कि उनके पिता रमेश कुशवाहा का उपचार सरस्वती हॉस्पिटल , कम्पू में किया गया और उपचार के दौरान 1लाख रुपए लिए गए। टांको से खून बहने की स्थिति में पहलवान के पिता को घर के लिए जबरन छुट्टी कर दी गई जबकि उसकी हालत मरणासन्न थी खून की उल्टी होने पर उन्हें सरस्वती हॉस्पिटल में पुनःभर्ती कराया जहां उपचार के दौरान रोगी रमेश कुशवाहा की मृत्यु दि,20/02/17 को हो गई ।
ग्राहक पंचायत ग्वालियर द्वारा पहलवान सिंह के माध्यम से अस्पताल के उपचार पेपर्स लिए गए, उपचार पेपर देखने पर ग्राहक पंचायत को ज्ञात हुआ कि सरस्वती हॉस्पिटल में गजराराजा मेडिकल कॉलेज ग्वालियर में कार्यरत शासकीय चिकित्सक डॉक्टर राजेश प्रजापति एसोसिएट प्रोफेसर सर्जरी विभाग एवं डॉक्टर अर्चना प्रजापति (अर्चना आर्य) निजी सरस्वती हॉस्पिटल का संचालन कर रहे है , और दुसरी और राज्य सरकार से वेतन भी प्राप्त कर रहे है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्राहक पंचायत ग्वालियर द्वारा संबंधित डॉक्टर्स की शिकायत मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ग्वालियर को की गई ।
Cmho द्वारा डॉ बिंदु सिंघल ब डॉ अमित रघुबंसी की कमेटी गठित की गई । कमेटी द्वारा शिकायत सही पाई गई की डॉ अर्चना ब डॉ राजेश प्रजापति शाशकीय चिकित्सक हो कर निजी हॉस्पिटल चला रहे है तथा अयोग्य बीएएमएस चिकित्सकों की सेवाएं ली गई एवम् अन्य अनियमितता पाई गई ।
कमेटी द्वारा सरस्वती हॉस्पिटल बंद करने की अनुशंसा की गई तथा इस संबंध में डॉ ss jadon cm&ho द्वारा हॉस्पिटल को बंद करने का निर्णय लेकर डॉ अर्चना आर्य संचालक सरस्वती हॉस्पिटल को नोटिस जारी किया गया
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खुल्मखुला लूट

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पोस्ट महिपाल सिंह रावत
भ्रष्टाचार के विरुद्ध इस छोटी सी लड़ाई में साथ दे !
आज सफर करते समय रामनगर बस डिपो ड्राइवर द्वारा हमें एक ऐसे होटल Invitation Restaurant Garhmukteshwar /
Annapurna Dhaba Garhmukteshwar पर रुके जो कि "उत्तराखण्ड परिवहन रामनगर डिपो" द्वार अनुबन्धित है।तथा गाङी No UK 07PA0867 और रामनगर से दिल्ली गाड़ी इस होटल पर रुकी हमने कुछ नाश्ता करने के लिये सोचा और 4 प्लेट छोले भटूरे तथा 4 कोल्ड ड्रिंक का ऑर्डर दिया।और जब बिल हाथ मे आया तो। हम सभी हैरान थे छोले भटूरे के जो रेट मेनू कार्ड पर लिखे थे वे उस से कई गुना अधिक थे । तथा यही हाल कोल्ड ड्रिंक का भी था। हरएक बोतल पर उस के प्रिन्ट रेट से दो - तीन गुना चार्ज कर रहा था । तथा जब इस संबंध में ढाबा मालिक से बात की तो वो वैट और पता नहीं कौन कौन से टेक्स की बात कर रहा था।
हमने जो भी ऑर्डर किया था उस का पूरा बिल (रूपये) दे कर अपना पिंड उस होटल से छुडाया।
तथा साथ ही साथ इस बात की शिकायत बस ड्राइवर तथा कंडक्टर से की तो वह बोला ये तो इन का रोज का काम है इन ढाबे वालो का और कहने लगे कि हमें "रामनगर डिपो" के द्वारा सख्त निर्देश है । कि यहां पर गाडी रोकी जाए। अगर हम यहां गाडी नहीं रोकते है तो बस ड्राइवर और कंडक्टर को 1000/- रुपये का (टोटल 2000/-) प्रति चक्कर के हिसाब से जुर्माना देना पडता है डिपो में ।
मित्रो देख लीजिये किस प्रकार से खुले आम लूटाजा रहा है, यही हाल खतौली, मीरपुर, बिजनोर में भी है।और बहुत ही दुर्भाग्य की बात है कि ऐसे होटल "उत्तराखण्ड परिवहन निगम" द्वारा अनुबन्धित है । और मुझे लगा है कि इस तरह का वाक्य सिर्फ मेरे ही साथ हुआ है।मगर ऐसा नहीं था उस बस मे बैठे और 8 से 10 लोगो के साथ भी ऐसी ही खुल्मखुला लूट हुई थी।
जगह का नाम है : Garhmukteshwar गढगंगा
Address :
Invitation Restaurant Garhmukteshwar /
Annapurna Dhaba Garhmukteshwar
मित्रो इस पोस्ट को इतना आगे पहुचाओ कि ये घटना फिर किसी और के साथ न हो और परिवहन निगम इस होटल पर कुछ कार्यवाही जरूर करें।
M. S. Rawat
Ghaziabad ( U.P.)
9899182800

Thursday, May 25, 2017

Bad/Objectionable/Misleading Advertisement :

Bad/Objectionable/Misleading Advertisement :
Dear Consumers if you hear or view bad / objectionable/ misleading advertisement on Radio, TV or Print media then please make written complaint to Advertising and Standards Council of India on their website: www.ascionline.org
You can also make complaint on WhatsApp No 07710012345
All consumers please note this and help us to correct the system.
खोट्या, फसव्या व अश्लील जाहीराती ऐकल्या, पाहील्या वा वाचल्या असल्यास बिंधास्त लेखि तक्रार एडव्हर्टाईझींग स्टॅडर्डस काऊंसील आॅफ इंडीया च्या वेबसाइट वा व्हाट्स अप नं 07710012345 वर करा व ग्राहक राजा आहे हे दाखवुन द्या।
Consumer is king!
Vijay Sagar
President
Akhil Bhartiya Grahak Panchayat Pune Mahanagar Branch
634, Sadashiv Peth, Gole Complex,
Pune 411030

विषय : अलीगढ में अवैध कालोनी एवम अवैध निर्माण , जिम्मेदारी किसकी ?

दिनांक २५ मई २०१७
मुख्य मंत्री को खुला पत्र
माननीय योगी आदित्यनाथ जी ,
मुख्य मन्त्री , उत्तरप्रदेश , लखनऊ
विषय : अलीगढ में अवैध कालोनी एवम अवैध निर्माण , जिम्मेदारी किसकी ?
महोदय ,
विगत दिनों अलीगढ के समाचार पत्रों में प्रकाशित उपरोक्त विषय से सम्बंधित समाचार पढ़कर कोई आश्चर्य नहीं हुवा I ऐसा निश्चय ही उत्तरप्रदेश के अन्य शहरों में भी अवैध निर्माण जैसे बहुमंजिला इमारते / अवैध कालोनिया अवश्य ही बनाई गई होंगी I अतः इनका नियमितीकरण / ध्वस्तीकरण होना ही चाहिए I परन्तु यक्ष प्रश्न यह है कि प्रदेश में लम्बे समय से सुनियोजित विकास हेतु विकास प्राधिकरण बनाए गए है , जिनके शीर्ष पर प्रदेश के सबसे योग्य एवम दक्ष मानी जाने वाली सेवा से आये आइएस / पीसीएस अधिकारिओ को विराजमान किया जता है I अतः क्या इन अधिकारियों को शहर में आँखे खोलकर चलने की मनाही है , शहर में जब कभी अवैध निर्माण की पहली ईंट लगती है तो इन विभागों का जीव सूंघता हुवा मिनटों में वहाँ पहुँच जाता है I
अतः अवैध निर्माणों का नियमितीकरण अथवा ध्वस्तीकरण तो शायद होता रहेगा , परन्तु जिन अधिकारियों ( उपाध्यक्ष , टाउन प्लानर , सीनियर एवम जूनियर इंजिनियर आदि ) के कार्य काल में ये अवैध निर्माण विकसित हुवा उनकी सेवा का ध्वस्तीकरण शायद ही कभी हो पाए , क्यूंकि तन्त्र की इस श्रृंखला में इनके बिग ब्रदर इनकी रक्षार्थ तन्त्र की उच्च सोपान पर विराजमान है I
महोदय , क्या आपके कार्यकाल में भ्रष्टाचार के इन कु-कृत्यों के लिए सम्पूर्ण ध्वस्तीकरण नहीं तो कम से कम इनकी सेवा पुस्तिका में एक कील भी नहीं ठोकी जा सकती , जिससे कि भविष्य के लिए सनद रहे और वक्त ज़रूरत काम आये I
धन्यवाद सहित
भवदीय
ई विक्रम सिंह
ई मेल : vikram06@gmail.com
संलग्न : अखबार की खबर की छाया प्रति
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Monday, May 22, 2017

खाली पेट लीची खाने से मारे गए बच्चे

खाली पेट लीची खाने से मारे गए बच्चे
बिहार में रहस्यमयी तरीके से सैकड़ों बच्चों की मौत की वजह बनी बीमारी का पता चला है. वैज्ञानिकों का दावा है कि बच्चों की मौत खाली पेट लीची खाने से हुई..
1990 के दशक में बिहार में गर्मियों में बच्चों की अचानक मौत का सिलसिला शुरू हुआ. हर साल 100 से ज्यादा बच्चे एक ही तरीके से मारे जाने लगे. स्वस्थ होने के बावजूद उन्हें अचानक चक्कर आता, बदन अकड़ जाता और फिर वे बेहोश हो जाते. आधे बच्चे फिर कभी आंख नहीं खोल पाए. डॉक्टरों को पता ही नहीं चला कि ऐसा क्यों हो रहा है.
लेकिन अब अमेरिका और भारत के वैज्ञानिकों ने रहस्यमयी मौतों का कारण खोजने के दावा किया है. मेडिकल साइंस की पत्रिका 'द लैंसेट' में छपे शोध के मुताबिक बच्चे लीची के जहर हाइपोग्लिसिन से मारे गए.
बिहार का मुजफ्फरपुर जिला अपनी लीचियों के लिए मशहूर है. हर साल सीजन के दौरान दर्जनों मजदूर अपने परिवार के साथ बगीचे में ही रहते हैं. वैज्ञानिकों के मुताबिक इस दौरान बच्चों ने अक्सर खाली पेट जमीन पर गिरी हुई लीचियां खायीं.
लीची में एक किस्म का विष हाइपोग्लिसिन होता है जो शरीर में ग्लूकोज के निर्माण को रोक देता है. शरीर में यह जहर जाते ही बच्चों के खून में शुगर की मात्रा अचानक गिर गई. रात में खाना न खाने की वजह से उनके शरीर में पहले ही बहुत कम ऊर्जा थी, ऊपर से शुगर लेवल के और नीचे गिरने से सेहत अचानक बिगड़ गई.
खाली पेट लीची खाकर जहर का शिकार हुए बच्चे अचानक चीखते और फिर अकड़कर बेहोश हो जाते. वैज्ञानिकों के मुताबिक मस्तिष्क में बहुत ही खतरनाक सूजन होने से ऐसा चलते होता था. मई और जून 2014 के दौरान मुज्जफरपुर के अस्पताल में भर्ती बच्चों की जांच के दौरान मस्तिष्क में सूजन का पता चला.
ऐसी ही बीमारी कैरेबियाई द्वीपों में भी सामने आ चुकी है. कैरेबियाई द्वीपों में एकी नाम के फल की वजह से ऐसा हो रहा था. एकी में भी लीची की तरह हाइपोग्लिसिन होता है जो शरीर को ग्लूकोज बनाने से रोकता है.
कैरेबिया में हुई रिसर्च के नतीजों को मुज्जफरपुर से मिलाने के बाद ही वैज्ञानिकों ने यह दावा किया. अब मुजफ्फरपुर के लोगों को बताया गया है कि वे अपने बच्चों को पक्के तौर पर रात में खाना खिलाएं. और बच्चों को ज्यादा लीची न खाने दें. अधिकारियों ने इस बात पर भी जोर दिया है कि हाइपोग्लिकैमिया या लो ब्लड शुगर के पीड़ित बच्चों को फौरन इमरजेंसी इलाज मिलना चाहिए.
खायें लेकिन संभलकर
सेब
एक सेब रोज, यह सलाह हर कोई देता है. लेकिन इसके बीज नहीं खाने चाहिए. सेब के बीज में एमिगडलिन होता है. पाचक रसों से मिलने पर यह हाइड्रोजन साइनाइड बना सकता है. इसीलिए बेहतर है कि सेब खाएं और उसके बीज नहीं.
आलू
बहुत ही लंबे समय तक रखे गए आलू को खाने से बचें. आलू के अंकुर में विषैला ग्लाइकोएल्केलायड होता है. कच्चे और हरे आलू को भी न खाएं. उसमें सोलैनिन होता है जो सेहत के लिए अच्छा नहीं होता.
फुगु मछली
जापान में फुगु मछली को लजीज माना जाता है. लेकिन इसे पकाने में बेहद सावधानी बरतनी पड़ती है. इस मछली के लिवर में टेट्रोडोटॉक्सिन होता है. यह साइनाइड से 1,200 गुना ज्यादा जहरीला होता है.
टमाटर
हरे टमाटर नहीं खाने चाहिए. इनमें भी सोलैनिन होता है. इसका सेवन करने से सिरदर्द और उल्टी की शिकायत हो सकती है.
जायफल
इसकी चुटकी भर मात्रा नुकसान नहीं पहुंचाती. लेकिन अगर एक बार में चार ग्राम से ज्यादा जायफल खाया जाए तो नाक बहने और सिरदर्द होने की समस्या हो सकती है. असल में जायफल में एलेमिसिन, मिरिस्टिसिन और सैफरोल तत्व होते हैं जो नशीले भी होते हैं.
बादाम
बहुत ज्यादा मात्रा में जंगली बादाम खाने से बचना चाहिए. ज्यादा सेवन से शरीर पर विषैला असर होता है. बादाम अगर कड़वा हो, तो ना खाएं.
जैतून का तेल
इसके कई फायदे हैं. लेकिन छोंक लगाने के लिए इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. 180 डिग्री से ज्यादा गर्म होने पर ओलिव ऑयल के तत्व विषैले कपाउंड में बदलने लगते हैं.
ब्रेड
ब्रेड कई प्रकार की होती है. इन्हें आटे या मैदे से बनाया जाता है. लेकिन गूंथे हुए मैदे पर खमीर चढ़ने के दौरान पोटेशियम ब्रोमेट बनता है. हालांकि ब्रेड बनाने के दौरान यह ब्रोमेट ब्रोमाइड में बदल जाता है. लेकिन अगर ब्रेड बनाने में सावधानी न बरती जाए तो ब्रोमेट बरकरार रहता है और ट्यूमर जैसी घातक बीमारी दे सकता है.
Source- DW

Saturday, May 20, 2017

सब बर्बाद कर रहा मांस का जायका

सब बर्बाद कर रहा मांस का जायका
40 बड़े निवेशकों ने दुनिया भर की फूड कंपनियों से अपील की है कि वे शाकाहार को बढ़ावा दें. 1,250 अरब डॉलर की संपत्ति के मालिकों का कहना है कि मीट खाने और बेचने के चक्कर में धरती बर्बाद हो जाएगी..
इंसान की खुराक में प्रोटीन की अहम भूमिका है. प्रोटीन शरीर में मांसपेशियों का निर्माण करता है. फिलहाल दुनिया भर में प्रोटीन का सबसे मुख्य जरिया मांस है. इसी वजह से फूड कंपनियों ने विशाल मीट उद्योग खड़ा कर दिया. लेकिन अब इसके नुकसान सामने आ रहे हैं. मुर्गियों और मछलियों को तेजी से बड़ा करने के लिए बहुत ज्यादा रसायनों का इस्तेमाल किया गया. सस्ता मीट बेचने की होड़ के चलते ऐसे ऐसे प्रयोग किये गए कि पर्यावरण और सेहत संबंधी परेशानियां खड़ी हो गई हैं.
अब बड़े निवेशक इस स्थिति को बदलना चाहते हैं. बीमा कंपनी अविवा समेत स्वीडन के कई सरकारी पेंशन फंड्स ने प्रमुख फूड कंपनियों को एक खत लिखा है. 23 सितंबर लिखी गई चिट्ठी में फूड कंपनियों से अपील की गई है कि वे पौधे से मिलने वाले प्रोटीन को बढ़ावा दें. खत क्राफ्ट हाइंज, नेस्ले, यूनिलीवर, टेस्को और वॉलमार्ट जैसी दिग्गज कंपनियों को भी भेजा गया है.
फॉर्म एनिमल इनवेस्टमेंट एंड रिटर्न इनिशिएटिव के संस्थापक जेरेमी कोलर के मुताबिक, "दुनिया की बढ़ती प्रोटीन की मांग को पूरा करने के लिए अगर फैक्ट्रियों में पाले जाने वाले मवेशियों का ही सहारा लिया गया तो वित्तीय, सामाजिक और पर्यावरणीय संकट उभरेगा." कोलर निवेश कंपनी कोलर कैपिटल के मुख्य निवेश अधिकारी हैं.
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोध के मुताबिक अगर लोग मांस खाना कम कर दें तो 2050 तक सेहत और जलवायु संबंधी खर्च में 1500 अरब डॉलर की कमी लाई जा सकती है. शोध के मुताबिक मीट उद्योग पर नकेल कसने की तैयारी भी शुरू हो चुकी है. डेनमार्क में रेड मीट पर टैक्स लगाने की योजना बन रही है. चीन सरकार अपने नागरिकों में मीट की खपत 50 फीसदी कम करना चाहती है.
ज्यादातर फू़ड कंपनियां प्रोसेस्ड मीट बेचती हैं. एंटीबायोटिक और प्रिजर्वेटिव से भरपूर यह मीट कैंसर और कई दूसरी बीमारियों को जन्म देता है. बूचड़खानों से निकलने वाला गंदा पानी भी एक बड़ी समस्या है. अमेरिका और कनाडा की कुछ नदियां तो मीट उद्योग के चलते बुरी तरह दूषित हो चुकी हैं. मीट उद्योग का कचरा भी बड़ा सिरदर्द है. यह दूसरे जीवों को भी बीमार करता है. बीते 10 सालों में दुनिया ने बर्ड फ्लू, स्वाइन फ्लू और इबोला जैसी महामारियों का सामना किया है. ये सभी बीमारियां संक्रमित मीट से इंसान तक पहुंचीं.
रेड मीट
हल्की फुल्की मात्रा में रेड मीट का सेवन नुकसानदेह नहीं है, लेकिन उसकी अति नुकसान पहुंचाती है. यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया की एक स्टडी के मुताबिक रेड मीट में एक प्रकार का सिलिसिक एसिड होता है जिससे कैंसर हो सकता है.
कार्बोनेटेड ड्रिंक्स
कोका कोला, पेप्सी और अन्य कार्बोनेटेड ड्रिंक्स में ना सिर्फ अत्यधिक चीनी होती है बल्कि बहुत सारा सोडियम भी होता है. इसके अलावा डायट सॉफ्टड्रिंक्स और भी हानिकारक होती हैं क्योंकि उनमें कृत्रिम स्वीटनर के इस्तेमाल के कारण सोडियम की मात्रा और भी ज्यादा होती है. अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक मानव मस्तिष्क इन पेय पदार्थों के ऊपर अपनी निर्भरता विकसित कर लेता है.
मैदा
मैदे में सफेदी ब्लीच की प्रक्रिया के कारण आती है. यह ब्लीच क्लोरीन गैस से की जाती है. इसी ब्लीच का इस्तेमाल तरल रूप में कपड़ों के लिए भी किया जाता है. इससे ना सिर्फ इस सफेद आटे में से सारा पोषण धुल जाता है बल्कि कैंसर का खतरा भी बढ़ता है.
नमकीन स्नैक
बहुत ज्यादा नमक वाले स्नैक से बचना चाहिए क्योंकि इनमें कैंसर पैदा करने वाले तत्व मौजूद होते हैं. चिप्स को कुरकुरा बनाए रखने के लिए निर्माता इसमें एक्रिलामाइड मिलाते हैं जो कि सिगरेट में भी पाया जाता है. इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर के मुताबिक एक्रिलामाइड कैंसर पैदा करने वाली चीज मानी जाती है.
वेजिटेबल ऑयल
सूर्यमुखी से प्राप्त वेजिटेबल ऑयल को देखने में अच्छा बनाने के लिए कई बार रंगाई की प्रक्रिया से गुजारा जाता है. इस तेल में ओमेगा 6 फैटी एसिड होता है जो स्वास्थ्य के लिए अच्छा है. लेकिन अगर अत्यधिक मात्रा में इस्तेमाल किया जाए तो ब्रेस्ट और प्रोस्टेट कैंसर का खतरा रहता है. ये नतीजे द जर्नल ऑफ क्लीनिकल इंवेस्टिगेशन में प्रकाशित किए गए.
प्रोसेस्ड मीट
सॉसेज और कॉर्न्ड बीफ जैसी चीजें खाने में बेशक लजीज होती हैं लेकिन इनमें नमक और प्रिजर्वेटिव की बड़ी मात्रा होती है. प्रोसेस्ड या संसाधित मीट को तैयार करने में इस्तेमाल किया जाने वाला सोडियम नाइट्राइट कैंसर पैदा कर सकता है.
नॉन ऑर्गेनिक फल
इस तरह के फलों को पैदा करने के लिए इस्तेमाल में होने वाले पेस्टिसाइड और नाइट्रोजन फर्टिलाइजर शरीर के लिए हानिकारक हैं. न्यूकासल यूनिवर्सिटी के रिसर्चरों के मुताबिक इस तरह के फलों के नियमित इस्तेमाल से कैंसर का खतरा रहता है.
रिपोर्ट: आरजेडएन/एसएफ- DW