Friday, June 9, 2017

सही बाल नहीं काटने पर हेयर ड्रेसर पर जुर्माना

सही बाल नहीं काटने पर हेयर ड्रेसर पर जुर्माना
सेवा में कमी पर उपभोक्ता फोरम ने सुनवाई के बाद हेयर ड्रेसर पर 22 हजार रुपये अर्थदंड का फैसला सुनाया ।
रुद्रपुर (ऊधमसिंह नगर) । सेवा में कमी पर उपभोक्ता फोरम ने सुनवाई के बाद हेयर ड्रेसर पर 22 हजार रुपए अर्थदंड का फैसला सुनाया है। महिला ने हेयर ड्रेसर पर मन मुताबिक काम न कर मानसिक क्षति पहुंचाने का आरोप लगाया था।
रेनू पंत पत्नी अंबिका पंत निवासी जजी कालोनी नैनीताल रोड रुद्रपुर ने उपभोक्ता फोरम में शिकायत की थी। रेनू के अनुसार उसने 27 मार्च 2016 को गुरु अंगद देव कांप्लेक्स स्थित जावेद हबीब हेयर एंड ब्यूटी सेंटर पर अपने बाल कटवाए थे, लेकिन वहां कार्यरत कर्मी ने उसके मन मुताबिक बाल नहीं काटे।
इसके चलते उसे भारी मानसिक व शारीरिक परेशानी उठानी पड़ी। इस पर उसने ब्यूटी सेंटर संचालक को 29 जून को विधिक नोटिस दिया। पार्लर संचालक ने नोटिस दिए जाने के बाद भी कोई जवाब नहीं दिया। इस पर रेनू ने अगस्त 2016 में उपभोक्ता फोरम में वाद दायर कर दिया।

टेलिकॉम कंपनियों पर 3,050 करोड़ के जुर्माने पर ट्राई ने DoT की नहीं सुनी

टेलिकॉम कंपनियों पर 3,050 करोड़ के जुर्माने पर ट्राई ने DoT की नहीं सुनी

# ग्राहक पंचायत
नई दिल्ली
टेलिकॉम रेगुलेटर ने दूरसंचार विभाग की भारती एयरटेल, वोडाफोन इंडिया और आइडिया सेल्युलर पर रिलायंस जियो को पर्याप्त इंटरकनेक्ट प्वाइंट्स (पीओआई) नहीं देने के मामले में 3,050 करोड़ के जुर्माने के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग ठुकरा दी है। रेगुलेटर ने यह भी कहा है कि उसके पास पब्लिक इंटरेस्ट में गड़बड़ी करने वाली कंपनियों पर जुर्माने की सिफारिश करने का अधिकार है।
टेलीकॉम डिपार्टमेंट को बुधवार को लिखे लेटर में टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ट्राई) ने कहा कि तीनों टेलीकॉम कंपनियों ने कॉम्पिटीशन कम रखने के लिए जानबूझकर जियो को पीओआई देने से मना किया, जो नियमों का उल्लंघन था। इससे बहुत बड़े स्तर पर ग्राहक भी प्रभावित हुए हैं. असल में इस गलती के लिए उनका लाइसेंस कैंसल किया जाना चाहिए था। इससे पहले टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने ट्राई को लिखी चिट्ठी में जुर्माने पर ऐतराज करते हुए कई सवाल खड़े किए थे।
ट्राई ने इसके जवाब में तीन अलग-अलग लेकिन एक जैसी बातों वाले लेटर में लिखा, 'तीनों कंपनियों का लाइसेंस कैंसल करने से लोगों को बहुत दिक्कत होगी। इसे ध्यान में रखते हुए हमने प्रति एरिया 50 करोड़ रुपये के जुर्माने की सिफारिश की है। लाइसेंस कैंसल करने की तुलना में यह पेनाल्टी बहुत कम है।' उसने हर कंपनी के लिए अलग से एक लेटर लिखा है। रेगुलेटर ने कहा, 'वास्तव में जो सजा मिलनी चाहिए थी, उससे कम की सिफारिश का भी हमें अधिकार है।' टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने कहा था कि ट्राई की जुर्माने की सिफारिश कानून के सामने नहीं टिक पाएगी, लेकिन रेगुलेटर ने इसे भी खारिज कर दिया है। उसने कहा कि सर्विस क्वॉलिटी और लाइसेंस संबंधी नियमों की लगातार अनदेखी और कारण बताओ नोटिस जारी करने के बाद यह जुर्माना लगाया गया है।
दूरसंचार विभाग अब ट्राई की राय को ध्यान में रखते हुए इस मामले में फैसला करेगा। वोडाफोन और आइडिया ने पहले इस मामले में किसी गड़बड़ी से इनकार किया था और उन्होंने अदालत में इसे चुनौती दी है। दोनों कंपनियों ने बुधवार को इस मामले पर कमेंट नहीं किया, लेकिन भारती ने ट्राई की दलीलों को खारिज कर दिया। उसने दूरसंचार विभाग से अपील की है कि वह रेगुलेटर की सिफारिशों को रिजेक्ट कर दे। भारती ने कहा, 'हम ट्राई की बात से सहमत नहीं हैं। हमारा मानना है कि जमीनी वास्तविकता का ध्यान रखे बिना जुर्माने की सिफारिश की गई है।' कंपनी ने कहा, 'हम दूरसंचार विभाग से इन सिफारिशों को रिजेक्ट करने की अपील करते हैं। हमने इस मामले में ग्राउंड लेवल पर जो पहल की है, उसका ध्यान रखा जाना चाहिए। सच तो यह है कि हमने जियो को अप्रत्याशित तेजी से साथ पीओआई दिए।' ट्राई ने इस मामले में पिछले साल अक्टूबर में भारती और वोडाफोन में से हरेक पर 1,050 करोड़ और आइडिया पर 950 करोड़ का जुर्माना लगाने की सिफारिश की थी।

जो जांचें घर में रहते हुए आसानी से कराई जा सकती थीं, अरबिंदो अस्पताल ने उसके लिए मरीज को चार दिन भर्ती रखा। हॉस्पिटल पर जुर्माना ।

जो जांचें घर में रहते हुए आसानी से कराई जा सकती थीं, अरबिंदो अस्पताल ने उसके लिए मरीज को चार दिन भर्ती रखा। हॉस्पिटल पर जुर्माना ।
इंदौर ।
जो जांचें घर में रहते हुए आसानी से कराई जा सकती थीं, अरबिंदो अस्पताल ने उसके लिए मरीज को चार दिन भर्ती रखा। रूम चार्जेस, सर्विस चार्जेस और इंवेस्टिगेशन फीस भी वसूली। परेशान मरीज ने उपभोक्ता फोरम में परिवाद दायर किया। फोरम ने अस्पताल को 10 हजार रुपए मानसिक और शारीरिक परेशानी के एवज में देने के आदेश दिए।
भागीरथपुरा निवासी मिताली जायसवाल गले में गठान की शिकायत के बाद 16 जून 2011 को अरबिंदो अस्पताल गई थीं। डॉक्टरों ने उन्हें दवाइयां लिखीं और 23 जून को आने को कहा। वे इस दिन अस्पताल पहुंचीं तो उन्हें बीमारी की जानकारी नहीं दी गई। उनसे कहा गया कि जांच रिपोर्ट चार दिन बाद 27 जून को मिलेगी, तब तक भर्ती रहना होगा।
25 जून को डॉक्टरों ने मरीज के पति से ऑर्डर शीट पर वापस आने का लिखवा कर उन्हें मरीज के साथ घर जाने की अनुमति दे दी। दो दिन बाद वे वापस अस्पताल पहुंचीं तो उन्हें 2 हजार 250 रुपए पेमेंट जमा कराकर डिस्चार्ज लेने को कहा गया। डिस्चार्ज में 23 से 27 जून तक भर्ती रखने का जिक्र था, जबकि इस अवधि में सिर्फ जांच की गई थी, कोई इलाज नहीं हुआ था।
मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान होने पर मिताली ने अस्पताल के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में शिकायत की। फोरम ने इसे स्वीकारते हुए माना कि जो जांच मरीज के घर पर रहते हुए हो सकती थी, उनके लिए भर्ती कर अस्पताल ने सेवा में कमी की है। फोरम ने अरबिंदो अस्पताल को आदेश दिया कि मरीज को हुए मानसिक और शारीरिक परेशानी के एवज में 10 हजार रुपए दें। रकम दो महीने में नहीं देने पर 12 प्रतिशत की दर से ब्याज भी देना होगा।

डाटा स्पीड के नाम पर उपभोक्ताओं को धोखा दे रहीं टेलीकॉम कंपनियां ।

डाटा स्पीड के नाम पर उपभोक्ताओं को धोखा दे रहीं टेलीकॉम कंपनियां ।
#ग्राहक पंचायत
दुनिया भर में इंटरनेट स्पीड का विश्लेषण करने वाली संस्था Open Signal के मुताबिक, 4G LTE स्पीड के मामले में भारत 75 देशों में 74वें नंबर पर है। भारत से ज़्यादा बुरे हालात सिर्फ कोस्टा रिका के हैं।
भारत में औसत 4G स्पीड 5.14 Mbps है। जबकि श्रीलंका और पाकिस्तान जैसे देशों की Rank भी हमसे ज्यादा है। इस रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान 66वें नंबर पर और श्रीलंका 69वें नंबर पर है।
भारत में 4G की औसत स्पीड 5.14 Mbps है जबकि दुनिया भर में 3G की औसत स्पीड 4.4 Mbps है यानी हम दाम तो 4G के दे रहे हैं लेकिन स्पीड लगभग 3G जैसी मिल रही है। वैसे भारत में 3G स्पीड का और भी बुरा हाल है भारत में औसत 3G स्पीड 1 Mbps से भी कम है।
दुनिया भर में 4G कनेक्शन पर डाउनलोड की औसत स्पीड 16.2 Mbps है। जबकि सिंगापुर में ये सबसे ज्यादा 45.62 Mbps है। दूसरे नंबर पर साउथ कोरिया है जहां आप 43.46 Mbps की स्पीड से Data Download कर सकते हैं।
विरोधाभास ये है कि 4G LTE नेटवर्क की उपलब्धता के मामले में भारत दुनिया के Top 20 देशों में शामिल है। भारत इस मामले में 15वें नंबर पर है।
भारत में 4G नेटवर्क की उपलब्धता 81.6 प्रतिशत है। जबकि पहले ये 71.6 प्रतिशत थी।
पिछले कुछ दिनों में भारत में 4G का विस्तार बहुत तेज़ी से हुआ है और इसके लिए एक विशेष कंपनी को श्रेय दिया जा रहा है। हम किसी भी कंपनी का नाम नहीं लेंगे लेकिन आप जानते हैं कि हम किसकी बात कर रहे हैं।
इस कंपनी की 4G Availability यानी उपलब्धता 90 प्रतिशत है और अगर इस कंपनी को हटा दिया जाए तो भारत में बाकी Telecom Operators मिलकर भी 60 प्रतिशत 4G Availability ही दे पा रहे हैं।
Open Signal की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 4G उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ने का नुकसान ये हुआ है कि भारत में 4G की स्पीड घट गई है। क्योंकि Internet पर Traffic बढ़ गया है और Infrastrucure में कुछ खास सुधार नहीं हुआ है।
Telecom Regulatory Authority of India के एक आंकड़े के मुताबिक भारत में पिछले साल सितंबर में Average Data Usage 236 MB प्रति महीना था जो दिसंबर में बढ़कर 884 MB हो गया।
लेकिन भारत में Internet की स्पीड बढ़ने की बजाय घटी है। भारत में 4G नेटवर्क की स्पीड पिछले 6 महीने में औसतन 1 Mbps कम हुई है।
TRAI के मुताबिक कुछ Subscribers की Data स्पीड 10 Kbps से भी नीचे चली जाती है।
FACEBOOK की एक नई स्टडी में दावा किया गया है कि अगर भारत में हर व्यक्ति की पहुंच इंटरनेट तक हो जाए..तो भारत की अर्थव्यस्था को 67 लाख करोड़ रुपये का फायदा होगा।
Study के मुताबिक भारत में इस वक्त करीब 46 करोड़ लोगों की पहुंच इंटरनेट तक है और इनमें से करीब 37 करोड़ लोग मोबाइल फोन पर इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं और करीब 21 करोड़ लोगों के पास 4G कनेक्शन है।
Study में कहा गया है कि अगर मोबाइल फोन कंपनियां DATA plans के दामों में 66 प्रतिशत की कटौती कर दें तो भारत के हर 5 में से 4 व्यक्ति इंटरनेट का इस्तेमाल कर पाएंगे। पिछले कुछ दिनों में कंपनियों ने अपने Data Plans को सस्ता भी किया है। लेकिन अब Internet पर Traffic ज्यादा हो गया है। जिसकी वजह से उपभोक्ताओं को High Speed Internet नहीं मिल पा रहा है।
यहां हम आपको Mbps के नाम पर हो रहे धोखे के बारे में बताना चाहते हैं। ज्यादातर कंपनियां अपना Data प्लान ये कह कर बेचती हैं कि उनकी Internet Speed 15 Mbps, 30 Mbps, 40 Mbps या इससे भी ज्यादा है। लेकिन कंपनियां जिस Mbps की बात कर रही हैं वो Megabit per second है। Megabit per second इंटरनेट की स्पीड मापने की बहुत छोटी यूनिट है। Mbps सुनकर ज़्यादातर लोगों को लगता है कि कंपनियां Megabyte per second की बात कर रही हैं। लेकिन असल में ऐसा होता नहीं है।
जब कोई कंपनी आपको 30 Megabit per second की स्पीड देने का वादा करती है तो वो दरअसल सिर्फ 3.625 Megabyte per second की स्पीड ही दे रही होती है। यानी टेलीकॉम कंपनियां आपको शब्दों के जाल में उलझाकर भी धोखा दे रही हैं।
वादे के मुताबिक इंटरनेट स्पीड नहीं दिए जाने पर ग्राहकों को इस संबंध में ट्राई को शिकायत दर्ज कराना चाहिए ।

माई कॉल’ एप पर कॉल गुणवत्ता का आकलन कर सकेंगे ग्राहक

माई कॉल’ एप पर कॉल गुणवत्ता का आकलन कर सकेंगे ग्राहक
भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने एक नया एप ‘माई कॉल’ शुरू किया है जिस पर ग्राहक उनके कॉल की गुणवत्ता की रेटिंग कर सकते हैं.
ट्राई ने एक बयान में बताया, ‘इस एप से मोबाइल फोन ग्राहक उनकी वॉयस कॉल की गुणवत्ता के बारे में वास्तविक समय में अपने अनुभव को साझा कर सकते हैं. इससे ट्राई को ग्राहकों के अनुभव और नेटवर्क की गुणवत्ता के बारे में आंकड़े जुटाने में मदद मिलेगी.’
इस एप में हर बार कॉल की समाप्ति पर एक पॉप-अप (नोटिफिकेशन) आएगा जिसमें ग्राहकों से कॉल की गुणवत्ता के बारे उनके अनुभव साझा करने का आग्रह होगा। इसमें ग्राहक सितारों के रूप में अपनी रेटिंग दे सकते हैं.

Tuesday, June 6, 2017

Banks become commercial and charging heavily. so you also be vigilant and dont west your money. Consumer is king.

Dear consumers,
I went to withdraw Rs 45000 from my saving bank account but after waiting for 30 minutes bank told me that server problem is there and you withdraw money from ATM. But
 to withdraw money more than 3 transaction we have to pay charges. and for withdraw of 45000 from ATM where ATM Limut is 10000 i have to do 5 transactions. Hence i made complaint to the bank for westing my time more than 15 minutes and for non payment.
After my complaint bank manager told me to withdraw using withdrawal slip.
Before me number of customers went back without taking money but they have not made written complaint. I made complaint so i got money.
Dear consumers, don't keep quite, lodge the complaint immediatly and if require make complaint in banking ombudsman or in consumer forum.
Banks become commercial and charging heavily. so you also be vigilant and dont west your money.
Consumer is king.
Vijay Sagar
President,
Akhil Bhartiya Grahak Panchayat
Pune Mahanagar
634, sadashiv peth, Gole complex, kumthekar road, Pune 30
For your information i am providing bank charges as received by email
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teckall
SBI’s revised service charges kick in from today: 6 transactions that get costlier
June 3, 2017
SBI’s revised service charges kick in from today: 6 transactions that get costlier
The new norms restrict the number of free ATM transactions from SBI ATMs, while also introducing fresh charges on electronic fund transfers, exchange of soiled notes and issue of cheque books and debit cardState Bank of India's revised norms for service charges- India Tv
Cash withdrawal from ATMs and bank accounts and electronic transfer of money are among a slew of banking activities that will invite charges now as the State Bank of India’s revised rules come into effect starting June 1.
The new norms, other than restricting the number of free ATM transactions from SBI ATMs, also introduce fresh charges on electronic fund transfers, exchange of soiled notes and issue of cheque books and debit cards, among others.
Here is a compilation of the new rules and how they will impact you:
IMPS fund transfers
This mode of electronic transfer of money will now invite charges on three levels. While transfers upto Rs 1 lakh will draw Rs 5 as service charge, transfers between Rs 1 lakh to Rs 2 lakh and Rs 2 lakh to Rs 5 lakh will be charged at Rs 15 and Rs 25 plus service tax respectively.
Exchange of soiled notes
Any exchange of over 20 pieces of soiled or imperfect notes worth above Rs 5,000 will attract a charge of Rs 2 per piece or Rs 5 per Rs 1,000 (whichever is higher) in soiled notes exchanged.
For example, for an exchange of 25 pieces of Rs.500 notes valuing Rs.12,500, a charge of Rs.50 (Rs.2 per piece) will be levied. However, in terms of value, a charge of Rs.62.50 (Rs.5 per Rs.1000) will be charged since it is the higher
Issue of cheque book
Getting a fresh cheque book issued will also attract certain charges starting today. While a cheque book with 10 leaves will be charged at Rs 30, a 25-leaf cheque book will attract a charge Rs. 75 and a 50-leaf cheque book will cost you Rs. 150.
Issue of ATM card
Only the RuPay classic card will come free of cost. All other debit and ATM cards will be charged.
Withdrawals
Four withdrawals in a month including ATM withdrawals will be free of charge. Withdrawals thereafter will be charged as below:
At Branch- Rs 50/- + ST per transaction.
At other bank ATMS- Rs. 20/- + ST per transaction.
SBI ATMs- Rs. 10/- + ST per transaction.
State Bank BUDDY: Service Charges
Cash withdrawal from Wallet Balance through ATM will cost Rs 25 per transaction. Similarly, cash deposits into your wallet through Business Correspondent (BC) will draw a charge of 0.25 per cent of the transaction value. The fee to be charged will be a minimum of Rs 2 and a maximum of Rs 8 for deposits up to Rs 10,000 in multiples of 100.
On the other hand, cash withdrawal from wallet balance through business correspondent upto Rs 2,000 will cost 2.5 per cent of the transaction value. Rs 6 has been set as the minimum charge to be levied under this head.

Sunday, June 4, 2017

यात्री को सफर में परेशानी होने के कारण उसे मुआवजे के तौर पर 75 हजार रुपए

राज्य उपभोक्ता आयोग ने भारतीय रेलवे को निर्देश जारी करते हुए एक यात्री को सफर में परेशानी होने के कारण उसे मुआवजे के तौर पर 75 हजार रुपए देने की बात कही है। डिस्ट्रिक्ट फोरम के फैसले को सही ठहराते हुए दिल्ली स्टेट कंज्यूमर डिस्प्यूट रेडरेस्सल कमीशन ने भारतीय रेलवे से यह भी कहा है कि टिकट चेकर की तनख्वाह में से एक तिहाई पैसा काटा जाए, जिसने सही व्यक्ति की सीट पर दूसरे व्यक्तियों के बैठ जाने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की। आयोग ने कहा कि डिस्ट्रिक्ट फोरम द्वारा मुआवजे के तौर पर यात्री को 75 हजार रुपए देने की बात करना बिलकुल उचित है।
यह मामला साल 2013 का है। इस पूरे मामले की जानकारी देते हुए पीड़ित यात्री विजय कुमार ने कहा कि 30 मार्च को वह दक्षिण एक्सप्रेस में विशाखापटनम से नई दिल्ली के लिए सफर कर रहे थे लेकिन उनकी आरक्षित सीट को किसी अन्य व्यक्ति द्वारा कब्जा कर लिया गया। उपभोक्ता केंद्र में कुमार द्वारा की गई शिकायत में दावा किया गया है कि उनके घुटनों में दर्द है, जिसके कारण उन्होंने ट्रेन में सबसे नीचे वाली सीट बुक कराई थी। मध्य प्रदेश के बीना स्टेशन पर कुछ लोग जबरदस्ती उनके कंपारटमेंट में घुस गए और उनमें से एक व्यक्ति ने कुमार की सीट पर कब्जा कर लिया। जब वहां मौजूद यात्रियों ने इसका विरोध किया तो उन्होंने सभी यात्रियों के साथ बदसलूकी करना शुरु कर दिया।
इसके बाद कुमार ने टिकट चेकर और रेलवे के अन्य अधिकारियों से इस मामले की शिकायत करने की कोशिश की तो उन्हें कोई नहीं मिला। बाद में जब इस मामले के बारे में रेलवे को सूचना दी गई तो उन्होंने इसपर कुछ नहीं कहा और न ही अपनी गलती मानी, जिसके बाद डिस्ट्रिक्ट फोरम ने उन्हें निर्देश जारी कर यात्री को मुआवजा देने के लिए कहा था। वहीं कुमार ने इस मुआवजे को बढ़ाने के लिए सिफारिश की थी जिसे कंज्यूमर कोर्ट ने सुनवाई के दौरान मना कर दिया। इस केस की सुनवाई करते हुए जस्टिस वीणा बीरबल ने कहा कि यात्री को दिया जाने वाला मुआवजा काफी है और इसमें कोई भी इजाफा होना उचित नहीं है।