Monday, October 2, 2017

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सभी स्कुल में मानको के विपरीत एक क्लास में बहुत अधिक संख्या में छात्र छात्राओं का पठन पाठन एक ही सेक्शन में 60 / 70 छात्र छात्राए , जो की मानको के विपरीत है I

दिनांक ०१ अक्तूबर २०१७
अध्यक्ष , केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ,
शिक्षा केन्द्र, 2, सामुदायिक केंद्र,
प्रीत विहार, दिल्ली - 110092
ई-मेल: chmn-cbse.nic.in
महोदय ,
विगत दिनों देश के गुरुग्राम स्थित एक बहुत ही प्रतिष्ठित विद्यालय में एक ७ वर्षीय छात्र की ह्त्या एवम दिल्ली में एक छात्र के साथ स्कुल के ही एक कर्मचारी द्वारा यौन उत्पीडन एवम अन्य घटनाए प्रकाश में आई है I
अलीगढ के भी अभिभावकों में ये सभी खबरे बहुत ही चिंताए उत्पन्न कर रही है , कारण यहाँ के सभी महंगे महंगे प्राइवेट स्कुल बच्चो की सुरक्षा एवम सुविधाओं पर बहुत ही उदासीन है एवम जमकर सभी तरह के मानको की अवज्ञा कर रहे है , जिनमे प्रमुख
१ सभी स्कुल में मानको के विपरीत एक क्लास में बहुत अधिक संख्या में छात्र छात्राओं का पठन पाठन एक ही सेक्शन में 60 / 70 छात्र छात्राए , जो की मानको के विपरीत है I
२ मनमाने ढंग से बिना किसी गाइड लाइन को अनुसरण किये फ़ीस में बढ़ोत्तरी करना I
३ स्कुल परिसर में सभी जगह यहाँ तक की क्लास रूम में भी CCTV कैमरे लगवाना I
४ स्कुल बसों का मानको के विपरीत संचालन एवम बोर्ड के दिशा निर्देशों के विपरीत , जिसमे
क. वाहनों को संचालन करने वाले ड्रावर कंडक्टर का किसी तरह का सत्यापन न करवाना I
ख. खटारा बसों , टेम्पो या वेन में उनकी क्षमता से अधिक बच्चो को ठूंस ठूस कर भरना
ग. अनाध्रिकित रूप से LPG से वाहनों का संचालन I
घ. यातायात पुलिस या परिवहन विभाग द्वारा समय समय पर इनकी कोई भी चेकिंग न करवाना I
५ स्कुल परिसर में वाहन पार्किंग की सुविधा न होना एवम वाहन चालाक ड्राइवर / कंडक्टर के लिए कोई सुविधा का निर्माण न करना I
६ स्कुल परिसर में छात्रो एवम स्टाफ के लिए अलग अलग शौचालय की सुविधा न होना I
७ स्कुल परिसर में छात्र एवम छात्राओं के लिए अलग अलग शौचालय एवम छात्राओं के शौचालय में महिला सफाई कर्मचारी की नियुक्ति I
८ स्कुल में अग्निशमन एवम प्राथमिक चिकित्सा हेतु कोई व्यवस्था न होना I
९ स्कुल में छात्र छात्राओं के दोपहर में टिफिन करने की कोई व्यवस्था नहीं है और बच्चे सभी भीषण गर्मियों में जब लू चल रही हो तापमान ४७ डिग्री तक पहुँच जाता है , और सर्दियों में सहित लहर चलती है . प्राइमरी क्लास के नौनिहाल भी बाहर मैदान में खुले में बैठकर अपना टिफिन खाने को बाध्य है , जिसके कारण यदा कदा ये बच्चे लू और ठण्ड से प्रभावित भी होते रहते है
इसके अलावा
1. इनको संचालित करने वाली सोसाइटी नियम विरुद्ध है I
2. इन स्कुल में कोई भी ट्रेंड शिक्षक नहीं है , और जो रखे गए है उनको भी नियमानुसार तनखाह एवम अन्य सुविधा कर्मचारी राज्य बीमा तथा भविष्य निधि की सुविधा नहीं है I
3. सबसे अहम् इन प्राइवेट स्कुल में RTE की घोर अवज्ञा , इनमे नियमानुसार गरीब तबके के बच्चो का दाखिला नहीं दिया जाता I
वृहत्तर छात्र हित में हम सभी निम्न संगठन आपसे अनुरोध करते है कि अलीगढ के भी प्राइवेट स्कुलो द्वारा बरती जा रही अनियमितताओं का संज्ञान लेते हुवे , सभी स्कुलो के लिए एक स्थानीय स्थाई जांच कमेटी का गठन करवाये , जिसमे जिले के शिक्षा विभाग , परिवहन विभाग , सामाजिक संगठनो के प्रतिनिधि शामिल हो , और उनकी रिपोर्ट के आधार पर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड , आवश्यक कार्यवाही कर , अलीगढ जिले के सभी अभिभावकों को उपकृत करेंगे I
आशा है न्यायहित में आप तवरित कार्यवाही करने की कृपा करेंगे ,
धन्यवाद सहित ,
भवदीय
संरक्षक , बिमल कुमार खेमानी , अध्यक्ष , ई विक्रम सिंह , 094127 32908
ट्रेप ग्रुप आफ आर टी आई एक्टिविस्ट ,
अध्यक्ष , उमेश श्रीवास्तव , 090581 29523 सचिव , अभय शर्मा
अलीगढ अभिभावक एसोशिएशन (रजि) ,
सचिव , आलोक वार्ष्णेय , 098373 31535 अध्यक्ष , रामनरेश यादव
वात्सल्य सेवा संस्थान (पंजी) ,
प्रशिक्षक , मुनीश जैन , 099270 05038 प्रशासक , DDC, दीपक खंडेलवाल
आर्ट आफ लिविंग ,
अध्यक्ष , राकेश कुमार शर्मा , 094122 72780 सचिव
भारत स्वाभिमान ट्रस्ट ( पतंजलि ) ,
प्रतिलिपी : P.A. , मानव संसाधन मंत्री , भारत सरकार , इसे माननीय मंत्री महोदय के संज्ञान में लाने हेतु

Sunday, October 1, 2017

बैंक के छुपे हुए चार्ज, जो वो काटते हैं और हमें पता भी नहीं चलता

बैंक के छुपे हुए चार्ज, जो वो काटते हैं और हमें पता भी नहीं चलता

कोई भी सेवा मुफ्त नहीं देता बैंक
शुरुआत होती है खाता खुलवाने से. बैंक आपसे इसके भी पैसे लेता है. एक तय रकम होती है. उतना तो आपको हर समय खाते में रखना ही पड़ेगा. फिर आपके सामने एटीएम कार्ड लेने का विकल्प है. इसके लिए आपको पैसे खर्च करने होते हैं. कुछ बैंक कार्ड बनवाने के लिए पैसे नहीं लेते. लेकिन सारे बैंक कार्ड के इस्तेमाल के लिए एक सालाना रकम ज़रूर वसूलते हैं. पैसे निकालने पर भी पैसे कटते हैं. बैंक आपको खाते से संबंधित जानकारियां देने के लिए जो SMS भेजता है, उसके भी पैसे चार्ज करता है. फिर इंटरनेट और मोबाइल बैंकिंग भी हैं. ये सुविधाएं भी मुफ्त नहीं मिलतीं. चेकबुक के भी पैसे लगते हैं.

नवंबर 2016 में नोटबंदी लागू होने के बाद बैंकिंग सेक्टर में कई बदलाव हुए हैं.

कई तरह के होते हैं बैंक अकाउंट्स, अलग-अलग हैं सबके नियम
बैंक अकाउंट्स कई तरह के होते हैं. करंट डिपॉज़िट अकाउंट. सेविंग्स अकाउंट, जिसे बचत खाता भी कहते हैं. रेकरिंग अकाउंट. फिक्स्ड डिपॉज़िट अकाउंट. सब खातों के नियम अलग हैं. आम लोगों का साबका ज़्यादातर बचत खाते और फिक्स्ड डिपॉज़िट खाते से पड़ता है.
लगातार घट रहा है सेविंग्स और फिक्स्ड डिपॉज़िट पर मिलने वाला ब्याज
आप अपने खाते में जो पैसे रखते हैं, उसका इस्तेमाल कर बैंक अपनी कमाई करता है. इसीलिए खाते में रखे उन पैसों के बदले बैंक आपको ब्याज देता है. ब्याज की दर दिनों-दिन गिरती जा रही है. बचत खाते पर कभी तकरीबन 8% ब्याज मिला करता था. फिर घटकर 6% हो गया. अब ज़्यादातर बैंक 4% ब्याज देते हैं. यस बैंक सेविंग्स अकाउंट पर सबसे ज़्यादा 6 फीसद ब्याज देने का खूब प्रचार करता है. लेकिन इस ऐड में शर्तों वाले सितारे जुड़े होते हैं. नियम और शर्तें लागू टाइप्स. शर्त ये है कि अगर बचत खाते में 1 लाख से ज़्यादा पैसे जमा हैं, तो उस पर 6% ब्याज मिलेगा. 1 लाख से कम पैसा रखने वालों को वही 4% इंटरेस्ट मिलेगा.
जो लोन बैंक देता है, उस पर लगने वाला ब्याज बढ़ता जा रहा है
बैंक कई तरह के लोन देता है. होम लोन. कार लोन. बाइक लोन. एजुकेशन लोन. पर्सनल लोन. गोल्ड लोन. बिज़नेस लोन. क्रेडिट कार्ड के ज़रिए भी हम छोटे-छोटे कर्ज़ ही ले रहे होते हैं. इन सब पर अलग-अलग तरह का ब्याज वसूला जाता है. ब्याज की दर बढ़ती जाती है. ऐसा नहीं कि सभी बैंकों की ब्याज दरें एक जैसी हों. ICICI बैंक 8.35% की दर से होम लोन देता है. कार लोन पर ICICI 9.75% ब्याज लेता है. पर्सनल लोन पर इंटरेस्ट रेट 10.99% है. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) 8.35% ब्याज पर होम लोन देता है. GST आने के बाद होम, पर्सनल और ऑटो लोन महंगा नहीं हुआ है. उन पर सर्विस टैक्स नहीं लगाया गया है. हां, लोन के आवेदन को आगे बढ़ाने और उस पर कार्रवाई करने के लिए बैंक जो प्रोसेसिंग फीस लेता है, वो महंगी हो गई हैं.
सरकार कैशलेस ट्रांज़ेक्शन को बढ़ावा दे रही है, लेकिन कई जगह इस पर अतिरिक्त चार्ज लगता है.
बैलेंस जांचना और मिनी स्टेटमेंट लेना भी मुफ्त नहीं
खाते में मौजूद बैलेंस की जांच करना, एटीएम का पिन बदलना और मिनी स्टेटमेंट लेना ‘गैर वित्तीय’ (नॉन-फाइनेन्शियल) गतिविधियों में गिने जाते हैं. मिनी स्टेटमेंट में आपके बैंक खाते में मौजूद रकम और पिछले कुछ ट्रांज़ेक्शन्स की जानकारी होती है. माने पिछली बार कब कितना रुपया आया. कितना निकाला गया. कई निजी बैंक इसके लिए भी ग्राहक से पैसे लेते हैं.
GST के बाद और महंगी हुई है बैंकिंग
1 जुलाई से GST (गुड्स एंड सर्विसेज़ टैक्स) लागू होने के बाद बैंकिग सेवाएं और महंगी हुई हैं. पहले इन पर 15% टैक्स लगता था. अब इसे बढ़ाकर 18% कर दिया गया है. पहले ग्राहक को 100 रुपए के ट्रांज़ेक्शन पर जितने रुपए देने होते थे, अब उससे 3 रुपए ज़्यादा खर्च करने होंगे. एटीएम से होने वाला लेन-देन, क्रेडिट और डेबिट कार्ड्स, इंश्योरेंस प्रीमियम और लोन की किस्त पर पहले 15% सर्विस टैक्स देना होता था. सर्विस टैक्स मतलब उस सुविधा को इस्तेमाल करने के एवज में दिया जाने वाला शुल्क. चेक बुक और डिमांड ड्राफ्ट्स जैसी सुविधाएं भी महंगी हुई हैं. फिक्स्ड डिपॉज़िट, बैंक अकाउंट डिपॉज़िट जैसी कुछ सुविधाएं फिलहाल GST से बाहर रखी गई हैं.
बैंक ट्रांज़ेक्शन से जुड़े कुछ नियमों पर गौर कीजिए:
– HDFC, ICICI और एक्सिस जैसे निजी बैंक महीने में 4 बार मुफ्त ट्रांज़ेक्शन की सुविधा देते हैं. इसके बाद जब भी आप अकाउंट में पैसे जमा करेंगे या निकालेंगे, तो एक सीमा से ऊपर हर ट्रांज़ेक्शन पर बैंक 150 रुपए लेगा. मिसाल के लिए HDFC बैंक में ये चार्ज 25,000 रुपए से ऊपर के ट्रांज़ेक्शन पर लगता है. इसमें सेस और अतिरिक्त टैक्स भी लगते हैं. तो कुल चार्ज 150 से ऊपर का बनेगा.
– HDFC तो बचत खाते के साथ-साथ सैलरी अकाउंट्स पर भी ये चार्ज लगाएगा.
– वरिष्ठ नागरिकों और बच्चों के खातों पर ये शुल्क नहीं लगेगा.
– अगर आपके पास बेसिक सेविंग्स अकाउंट है, तो महीने में 4 बार पैसा निकालने पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा. पैसा जमा करने पर भी कोई शुल्क नहीं देना होगा.
– होम ब्रांच और नॉन-होम ब्रांच के नियमों में भी फर्क है. होम ब्रांच यानी जहां आपका खाता है. नॉन-होम ब्रांच मतलब उसी बैंक की किसी और ब्रांच से लेन-देन करना.
– ICICI महीने में 4 बार होम ब्रांच से पैसा निकालने पर कोई शुल्क नहीं लेता. उसके बाद प्रति 1,000 रुपए पर 8 रुपए का शुल्क वसूला जाता है. थर्ड पार्टी लेन-देन की सीमा घटाकर 50,000 रुपए प्रति दिन कर दी गई है.
– नॉन-होम ब्रांच से पैसा निकालने पर ICICI पहला ट्रांज़ेक्शन मुफ्त करने देता है. उसके बाद प्रति 1,000 रुपए पर 8 रुपए का अतिरिक्त चार्ज लगाया जाता है. इस तरह के लेनदेन पर बैंक आपसे एक महीने में ज़्यादा से ज़्यादा 150 रुपए लेगा.

School Bus और Van एक Reality Check

School Bus और Van एक Reality Check
आपको बताते हैं कि ख़बरों की दुनिया में डर और जानकारी के बीच क्या फर्क होता है ? पिछले कुछ दिनों से देश के ज़्यादातर माता-पिता डरे हुए हैं. स्कूल में 7 साल के एक बच्चे की हत्या के बाद ये डर... देश के हर परिवार को परेशान कर रहा हैं. लोग जैसे ही इस डर से उबरने की कोशिश करते हैं.... वैसे ही हमारा मीडिया प्रद्युम्न की मौत से जुड़ा नया खुलासा करके.. उन्हें और डरा देता है. लोगों को डर और नाटकीयता से भरी हुई ख़बरें दिखाई जा रही हैं.. और Reporters को किसी जासूसी धारावाहिक का किरदार बनाकर पेश किया जा रहा है. लेकिन इस दौरान लोगों को जागरूक बनाने वाली ख़बरें सामने नहीं आ रही हैं. ज़ी न्यूज़ ने इस समस्या का इलाज करने के लिए अलग तरह की रिपोर्टिंग की है. हम एक एक करके.. उन समस्याओं पर फोकस कर रहे हैं.. जो देश के हर माता पिता के सामने आती हैं. ये सिर्फ एक ख़बर नहीं है.. बल्कि ये ख़बरों की एक सीरीज़ है जिसकी मदद से हम देश के सभी परिवारों को जागरुक करना चाहते हैं.
आज आपका मंत्र है... Scan... Analyse और Share.. यानी ख़बर को देखिए... हमारे विश्लेषण की मदद से उसे समझिए और फिर अपने परिवार और दोस्तों के साथ इसे शेयर कीजिए. इस तरह आप पूरे सिस्टम में सकारात्मक बदलाव करने का दबाव बना पाएंगे.
इस सीरीज़ में पहली समस्या है स्कूल बस. आपने ये महसूस किया होगा कि आपके बच्चे जिस स्कूल बस या Van से जाते हैं.. वो उनकी सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करती है. School Bus और Van में अक्सर क्षमता से ज़्यादा बच्चे सवार होते है.. और पैसा बचाने के लिए सुरक्षा के नियमों को तोड़ा जाता है. हमने इस विषय पर एक Reality Check किया है.. आप इसे ध्यान से देखिए.. हो सकता है कि हमारी रिपोर्ट में जो कुछ आपको दिखाई देगा.. वो आपके बच्चों के साथ भी हो रहा हो. इसके बाद हम आपको स्कूल बस से जुड़े नियम और शिकायत करने का तरीका बताएंगे. अगर आप हमारी इस मुहिम से जुड़कर अपनी बात कहना चाहते हैं तो #SchoolTerror पर Tweet करें
अब आपको बताते हैं कि अगर किसी स्कूल बस या Van में ऐसा हो रहा हो.. तो आप क्या कर सकते हैं.सुप्रीम कोर्ट की Guidelines के मुताबिक आपके बच्चे को स्कूल ले जाने वाली बस में First Aid Box और आग बुझाने वाला यंत्र होना बहुत ज़रूरी है...इसीलिए कल जब आप अपने बच्चे को स्कूल बस में बैठाने के लिए जाएं तो इन दोनों बातों का ध्यान रखें अगर ऐसा नहीं है तो आप स्कूल से इस बात की शिकायत कर सकते हैं इसके अलावा आप ये भी चेक कर लें कि स्कूल बस के ड्राइवर के पास लाइसेंस है या नहीं ? और क्या बस के स्टाफ का पुलिस वेरिफिकेशन करवाया गया है ? इसके अलावा उनके पास ID Card होना चाहिए.
आपको ये भी देखना होगा कि आपके बच्चे की स्कूल बस..... पीले रंग की होनी चाहिए... जिस पर हरे रंग की पट्टी पर स्कूल का नाम और फोन नंबर लिखा होना ज़रूरी है...अगर बस किसी प्राइवेट ठेकेदार की है तो बस के आगे On School Duty लिखा होना चाहिए. इसके अलावा स्कूल Cab या Bus की कुल सीटों की संख्या से ज़्यादा.. बच्चो को नहीं बैठाया जा सकता है...बस के स्टाफ के पास हर बच्चे की पूरी जानकारी होनी चाहिए जैसे बच्चे का नाम, उसके घर का पता, फोन नंबर और बच्चे का ब्लड ग्रुप भी...CBSE की नई Guidelines के मुताबिक स्कूल बस में GPS सिस्टम और CCTV कैमरे लगे होने चाहिए. अगर कोई स्कूल... सुरक्षा के लिए बनाए गये इन नियमों की अनदेखी कर रहा है तो आपको जागरूक होने की ज़रूरत है..नियमों की अनदेखी के लिए सबसे पहले आप स्कूल के प्रशासन से शिकायत करें. अगर स्कूल इसके बाद भी आपकी बात नहीं सुनता है तो अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए आप Child Helpline नंबर 1098 पर फोन कर सकते हैं. CHILDLINE नामक ये Helpline... 24 घंटे बच्चों की मदद लिए तैयार रहती है.
इसके अलावा CBSE Helpline Number 1800-11-8002 पर भी आप शिकायत कर सकते हैं . ये नियम- कानून आपके बच्चे की सुरक्षा के लिए बनाए गये हैं और किसी हादसे को रोकने के लिए नियमों की जानकारी होना बहुत ज़रूरी है..7 साल के एक बच्चे की हत्या ने स्कूलों की लापरवाही की पोल देश के सामने खोल दी है लेकिन बहुत कम स्कूलों ने इससे सबक लिया है. इसलिए आपको समय-समय पर स्कूल की चेकिंग करनी होगी. ये काम आप और हम मिलकर करेंगे. क्योंकि आपकी और आपके परिवार की सुरक्षा से जुड़ी ख़बरें दिखाना.. मीडिया का दायित्व है.
- Zee जानकारी