Wednesday, March 29, 2017

जेतल कंस्ट्रक्शन ग्वालियर की ग्राहक से बंधुओं धोखाधड़ी

जेतल कंस्ट्रक्शन के मालिक वीरेंद्र कुमार गुप्ता द्वारा ग्राहक प्रभात शर्मा व कई अन्यो के साथ कि गई धोखाधड़ी ।

ग्राहक बंधुओं से आग्रह है कि जेतल कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड से किसी भी प्रकार का व्यवहार करने से पूर्व कृपया सतर्कता बरतें ।

कारण यह है कि उपरोक्त कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा मुरैना निवासी ग्राहक प्रभात शर्मा से ग्राम - रमोआ ग्वालियर में फ्लैट बना कर देने हेतु रु 14 लाख 32 हजार का अनुबंध किया गया । ग्राहक समय समय पर रुपयों का भुगतान करता रहा तथा रु 5 लाख 32 हजार भुगतान करने के पश्चात ग्राहक को ज्ञात हुआ की साइड पर कोई निर्माण कार्य चल ही नहीं रहा है और बिल्डर रुपए लेते ही जा रहा है ।

ग्राहक को धोखाधड़ी का अनुमान होने पर बिल्डर से ब्याज सहित रुपए मांगे जाने पर बिल्डर द्वारा देने से इंकार कर दिया गया । साथ ही बिल्डर द्वारा ग्राहक को धमकाकर दुर्व्यवहार भी किया गया ।

इस संबंद्ध में ग्राहक प्रभात शर्मा द्वारा ग्राहक पंचायत ग्वालियर को शिकायत दर्ज कराई गई है । ग्राहक पंचायत ग्वालियर द्वारा उपरोक्त कंस्ट्रक्शन कंपनी के डायरेक्टर वीरेंद्र कुमार गुप्ता को ब्याज सहित रुपए वापस करने हेतु पत्र लिखा गया है अन्यथा वैधानिक कार्यवाही कर ऐसे धोखेबाज बिल्डरों के विरुद्ध चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा ।

इसी प्रकार का अनुचित व्यवहार बिल्डर वीरेंद्र कुमार गुप्ता द्वारा ग्वालियर के कई अन्य ग्राहक बंधुओं के साथ भी किया गया है । ग्राहक बंधु इस प्रकार के फ्रॉड बिल्डर्स के विरुद्ध आवाज़ उठाएं तथा पुलिस अधीक्षक ग्वालियर को पत्र सौंपे ।
अन्य पीड़ित ग्राहक इस संबंध में ग्राहक पंचायत ग्वालियर को अवगत करा सकते हैं ।

आवास या फ्लैट खरीदने से पूर्व ग्राहक बंधु इस संबंद्ध मैं रियल स्टेट रेग्युलेटर बिल का अवश्य अध्ययन करे व धोखाधड़ी से बचे ।
ज्यादा जानकारी हेतू ग्राहक पंचायत कार्यकर्ताओं से संपर्क कर सकते है ।

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लोकेन्द्र मिश्रा
9644848617
दीपक गोड़
7828650476
आकाश सोनी
9827359100
आशा सिंह
9826248084
प्रियंका राजावत
9691579777
संजीव श्रीवास्तव
9826539135
देवीसिंह राठौर
9425194338

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Bijwasi Sweets, Malad sells 7-month old expired Pepsi 7-Up stocks to Arshi Khan

Bijwasi Sweets, Malad sells 7-month old expired Pepsi 7-Up stocks to Arshi Khan
Posted by: Editor - IndiaNewsNet.IN  in Mumbai Suburbs News March 27, 2017 0 80 Views

Well Arshi Khan has a knack for getting into trouble. But this time, it was trouble that fell into Arshi Khan’s lap.
The actress who was travelling to Andheri via the S V Road on Monday evening, asked her assistant to get her a Pepsi bottle. She stopped her car outside Brijwasi sweets at S. V. Road Malad West, opposite the Mac Donalds and Domino’s Pizza stores and asked the store keeper for a soft drink bottle.
The store keeper gave her assistant Manish Yadav a 1.25 litre Pespsi 7-Up bottle and he handed it over to her.
After taking a few sips, Arshi Khan realised something was amiss. The 7 Up tasted different and there was something fishy about the beverage. It was not the regular 7-Up taste, she said.
On checking the manufacture date on the bottle, she realized that the  bottle was over 7 months old, well over the 3-months validity or stipulated date of validity.
She turned back her car and immediately sent her assistant back with the bottle to Brijwasi Sweets. The owner accepted the bottle back and returned the cash, but refused to apologize.
Arshi Khan had decided to take the matter ahead and will file complaints with the FDA and other statutory bodies.


Representatives of Brijwasi Sweets and Pespsi were not available for comment.

योगी सरकार ने शिकायत के लिए #Whatsapp नंबर

योगी सरकार ने शिकायत के लिए #Whatsapp नंबर किया जारी, 3 घंटे के अंदर होगा ऐक्शन
#UttarPradesh #YogiAdtiyanath WhatsApp #Helpline #Complaint

गन्ने की बिजाई का नया तरीका है जिस से गन्ना 3 गुणा ज्यादा निकलता है

जमीदार भाईयो ये गन्ने की बिजाई का नया तरीका है जिस से गन्ना 3 गुणा ज्यादा निकलता है ।।

ज्यादा से ज्यादा शेयर करे ताकि गन्ने की खेती करने वाले जमीदार भाईयों तक ये पहुंच जाऐ ।।

जमीदार ।।

गन्ना लगाने की गडढा बुवाई विधि भरतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान, द्वारा विकसित की गई हैं। दरअसल गन्ना बुवाई के पश्चात प्राप्त गन्ने की फसल में मातृ गन्ने एवं कल्ले दोनों बनते है । मातृ गन्ने बुवाई के 30-35 दिनों के बाद निकलते हैं, जबकि कल्ले मातृ गन्ने निकलने के 45-60 दिनों बाद निकलते है। इस कारण मातृ गन्नों की अपेक्षा कल्ले कमजोर होते है तथा इनकी लंबाई, मोटाई और वजन भी कम होता है । उत्तर भारत में गन्ने में लगभग 33 प्रतिशत अंकुरण हो पाता है, जिससे मातृ गन्नों की संख्या लगभग 33000 हो पाती है, शेष गन्ने कल्लों से बनते है जो अपेक्षाकृत कम वजन के होते है। इसलिये यह आवश्यक है कि प्रति हैक्टेयर अधिक से अधिक मातृ गन्ने प्राप्त करने के लिए प्रति इकाई अधिक से अधिक गन्ने के टुकड़ों को बोया जाए। गोल आकार के गड्ढों में गन्ना बुवाई करने की विधि को गड्ढा बुवाई विधि कहते हैं।

इस विधि को कल्ले रहित तकनीक भी कहते हैं। इस विधि से गन्ना लगाने के लिए सबसे पहले खेत के चारों तरफ 65 सेमी. जगह छोड़े तथा लंबाई व चौड़ाई में 105 सेमी. की दूरी पर पूरे खेत में रस्सी से पंक्तियों के निशान बना लें। इन पंक्तियों के कटान बिंदु पर 75 सेमी. व्यास व 30 सेमी. गहराई वाले 8951 गड्ढे तैयार कर लें। अब संस्तुत स्वस्थ गन्ना किस्म के ऊपरी आधे भाग से दो आँख वाले टुकड़े सावधानी पूर्वक काट लें। इसके पश्चात 200 ग्राम बावस्टिन का 100 लीटर पानी में घोल बनाकर 10-15 मिनट तक डुबों कर रखें। बुवाई पूर्व प्रत्येक गड्ढे में 3 किग्रा. गोबर की खाद 8 ग्राम यूरिया, 20 ग्राम डी.ए.पी., 16 ग्राम पोटाश, और 2 ग्राम जिंक सल्फेट डालकर मिट्टी में अच्छी प्रकार मिलाते है। अब प्रत्येक गड्ढे में साइकिल के पहिये में लगे स्पोक की भांति, दो आँख वाले उपचारित गन्ने के 20 टुकड़ों को गड्ढे में विछा दें। तत्पश्चात 5 लीटर क्लोरपायरीफास 20 ईसी को 1500-1600 लीटर पानी में घोल कर प्रति हैक्टेयर की दर से गन्ने के टुकड़ों के ऊपर छिड़क दें । इसके अलावा ट्राइकोडर्मा 20 किग्रा. को 200 किग्रा. गोबर की खाद के साथ मिलाकर प्रति हैक्टेयर की दर से टुकड़ों के ऊपर डाल दें। प्रत्येक गड्ढे में सिंचाई करने के लिए गड्ढों को एक दूसरे से पतली नाली बनाकर जोड़ दें । अब गड्ढो में रखे गन्ने के टुकड़ो पर 2-3 सेमी. मिट्टी डालकर ढंक दें। यदि मिट्टी में नमी कम हो तो हल्की सिंचाई करें। खेत में उचित ओट आने पर हल्की गुड़ाई करें जिससे टुकड़ो का अंकुरण अच्छा होता हैं। चार पत्ती की अवस्था आ जाने पर (बुवाई के 50-55 दिन बाद) प्रत्येक गड्ढे में 5-7 सेमी. मिट्टी भरें और हल्की सिंचाई करें तथा ओट आने पर प्रत्येक गड्ढे में 16 ग्राम यूरिया खााद डालें। मिट्टी की नमी तथा मौसम की परिस्थितियों के अनुसार 20-25 दिनों के अन्तराल पर हल्की सिंचाई और आवश्यकतानुसार निराई-गुड़ाई भी करते रहें। जून के तीसरे सप्ताह में प्रत्येक गड्ढे में 16 ग्राम यूरिया डालें। जून के अंतिम सप्ताह तक प्रत्येक गड्ढे को मिट्टी से पूरी तरह भर दें। मानसून शुरू होने से पूर्व प्रत्येक थाल में मिट्टी चढ़ा दें। अगस्त माह के प्रथम पखवाड़े में प्रत्येक गड्ढे के गन्नों को एक साथ नीचे की सूखी पत्तियों से बांध दें। सितम्बर माह में दो पंक्तियों के आमने-सामने के गन्ने के थालों को आपस में मिलाकर (केंचीनुमा आकार में )बांधे तथा गन्ने की निचली सूखी पत्तियों को निकाल दें। अच्छी पेड़ी के लिए जमीन की सतह से कटाई करें। ऐसा करने से उपज में भी बढ़ोत्तरी होती हैं। सामान्य विधि की अपेक्षा इस विधि द्वारा डेढ से दो गुना अधिक उपज प्राप्त होती है। केवल गड्ढों में ही सिंचाई करने के कारण 30-40 प्रतिशत तक सिंचाई जल की बचत ह¨ती है। मातृ गन्नों में शर्करा की मात्रा कल्लों से बने गन्ने की अपेक्षा अधिक होती है । इस विधि से लगाये गये गन्ने से 3-4 पेड़ी फसल आसानी से ली जा सकती हैं।
क्षेत्र विशेष के अनुसार उन्नत किस्म के गन्ने का चयन और बुआई की नवीनतम वैज्ञानिक विधि के अलावा गन्ना फसल की बुआई उपयुक्त समय पर (शरद्कालीन बुआई सर्वश्रेष्ठ ) करें तथा आवश्कतानुसार उर्वरकों एवं सिचाई का प्रयोग करें और पौध सरंक्षण उपाय भी अपनाएँ। समस्त सस्य कार्य समय पर सम्पन्न करने पर गन्ने से 100 टन प्रति हेक्टेयर उपज लेकर भरपूर मुनाफा कमाने का मूलमन्त्र यही है।

By :-

डाँ.गजेन्द्र सिंह तोमर
प्रमुख वैज्ञानिक,सस्यविज्ञान विभाग,
इंदिरा गांधी कृषि विश्व विद्यालय, रायपुर

अमेरिकन केसर उगाये और लाखों कमाए फ्रॉड गर्दी का नया नाम

फ्रॉड गर्दी का नया नाम अमेरिकन केसर!
आजकल चारों तरफ अखबारों में समाचारों में टीवी पर फेसबुक व्हाट्सअप पर खबरें चलायी जा रही हैं के अमेरिकन केसर उगाये और लाखों कमाए। पत्रकार साथियों में होड़ लगी है इसके किसानों से बिना मिले ही बिना जाँच पड़ताल के मोटिवेशनल स्टोरी छापने की।
साथियों की जानकारी के लिए अमेरिकन केसर कुछ और नहीं कुसुम(safflower) है जिसे मप्र महारास्ट्र में करडी के नाम से भी जानते हैं।ये तिलहन वर्गीय फसल है और इसे खाद्य तेल के लिए उगाया जाता है।(सफोला तेल इसी का होता है)
इसी से प्राप्त पुंकेसर(फूल के अंदर वाली पंखुड़ी,ऐसी ही केसर की होती है।)को असली केसर में मिलावट करके वर्षों से बेचा जाता है।ये एक दंडनीय अपराध है(मिलावट)।
इससे प्राप्त फसल यानी बीज बाजार में 3 से साढ़े तीन हजार रुपए कु में बिकते हैं और हमारे पत्रकार साथी कुछ दलालों को प्रोमोट करने पे लगे हैं जो इसका बीज 5 रुपए प्रति या 20 हजार रुपए किलो किसानों को बेचना चाहते हैं।

दरसल इसका कारण ये है कि हमारे पत्रकार साथी आजकल ग्राउंड जीरो पर न जाकर किसानों से रिपोर्ट लिखवा कर मंगा कर छापने में विश्वास करते हैं।
पत्रकार भाइयों आपने तो नँ बढ़ाने के लिए खबर छाप दी पर जो किसान आपकी खबर पढ़ कर लुटेगा उसका नुक्सान कैसे भरोगे।
सरकारी तंत्र का गूंगा पन तो जग जाहिर है पर आपका आलस किसानों को गर्त में डाल सकता है।

आप सब से निवेदन ही किया जा सकता है के फील्ड में जाकर इसकी वस्तुस्थिति पता करें पुनः खबर छापे। किसानों को भृमित होने से बचाये।

किसान भाई इस गोरखधंधे से बचें
ज्यादा जानकारी के लिए 09634865111 पर फोन करे साथी।





विषय : परीक्षाओ मे नकल मे नकेल न लगने के संबंध मे महोदय ,

श्री आदित्य योगी जी ,
माननीय मुख्य मंत्री , उत्तरप्रदेश शासन ,
लखनऊ
विषय : परीक्षाओ मे नकल मे नकेल न लगने के संबंध मे
महोदय ,

माना कि उत्तरप्रदेश मे नकल का ठेका पूर्ववर्ती अखिलेश सरकार के कार्यकाल मे विगत अनेक वर्षो कि भाँति ही उठाया गया था , परंतु नकल ठेकेदारो का दुर्भाग्य कि प्रदेश मे भारतीय जनता पार्टी की सरकार आपके नेतृत्त्व मे सत्तारूढ़ हो गई , परंतु हमारी आशाओ के विपरीत नकल अभी भी नहीं रुक पा रही ( अलीगढ़ से प्रकाशित विभिन्न समाचार पत्रो कि 7 कटिंग संलग्न ) । यह भी सच है कि इस ठेके मे पूर्ववर्ती सत्तानसीन पार्टी के अनेकों प्रभावी राजनेताओ के अतिरिक्त शिक्षा विभाग मे तैनात अनेकों अधिकारिओ की मूक सहमति लगता है अब भी जारी है । अलीगढ़ जिले का आम भाषा मे बोले जाने वाला अतरौलीया बोर्ड प्रदेश मे ही नहीं वरन प्रदेश के बाहर भी मशहूर है । यह अतरौली एक जाति विशेष का बाहुल्य क्षेत्र है , सरकार बदलने के बाद अब तो और भी अधिक ताल ठोक कर वहाँ के बाहुबली अधिकारियों को धमका रहे है कि अब तों हम ज्यादा मजबूत हो गए है ।

मान्यवर हमारा सरोकार 2 बिन्दुओ को लेकर है –
1. ऐसे होनहार विद्यार्थी जो अपने परिश्रम एवम विवेक से परीक्षा दे रहे है , सर्टिफिकेट प्राप्त करने के बाद मे जब अन्यत्र उच्च शिक्षा अथवा नौकरी हेतु जाएंगे तो उनको भी नकलची मानकर उनसे हेय दृष्टि से व्यवहार किया जाएगा ।
2. आप जैसे संत के कार्यकाल मे अगर यह गंदगी जारी रहती है तो इसके छींटे आप की सरकार पर भी आएंगे ही , जिससे हमे बहुत ही निराशा और वेदना होगी ।

अतः हमारा अनुरोध है कि प्रदेश की छवि सुधारने हेतु ऐसे त्वरित एवम कठोर कदम उठाए जाय जिससे नकल माफियाओ मे दशहत और जनता मे सकारात्मक संदेश जाये ।

भवदीय

ई विक्रम सिंह , अध्यक्ष , ट्रेप ग्रुप

संलग्न :
हिंदुस्तान , अलीगढ़ की कटिंग दिनांक 18 मार्च , 20 मार्च 2017
दैनिक जागरण , अलीगढ़ , 19 मार्च , 20 मार्च , 21 मार्च , 24 मार्च 2017
अमर उजाला अलीगढ़ , 24 मार्च 2017
दिनांक: 28/03/2017 (जीवनदीप)

जागो पेरंटस जागो

प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ इस बच्ची का संघर्ष काबिले तारीफ है । जैसे इस बच्ची ने पहले लगातार कई महीनों तक डीसी दफ्तर जालंधर के आगे धरना लगाया था और अपने मकसद के लिए डटी रही । उसी तरह यह जागरुक बच्ची अब एक बार फिर आप सभी के हकों के लिए तथा शिक्षा को इन भ्रष्ट प्राइवेट स्कूल माफिया से आजाद करवाने के लिए संघर्ष छेड़ रही है ।
इस संघर्ष पहली कड़ी के तहत इस बच्ची ने जालंधर छावनी के विधायक परगट सिंह से मुलाकात की और उन्हें कहा कि आप प्राइवेट स्कूलों द्वारा लूट की जा रही का मुद्दा इस विधान सभा सेशन में उठाए , तो प्रगट सिंह जी ने इन्हें बोला के अभी पंजाब विधानसभा में यह मुद्दा नहीं उठा सकते क्योंकि अभी और काम बहुत बाकी हैं ।
यह वही प्रगट सिंह हैं जब वह आज़ाद विधायक थे तब खुद आकर इस बच्ची के साथ धरने पर बैठ गए थे। अब जब इनकी खुद की सरकार बनी है तब यह हाथ पीछे खींच रहे हैं।
इसका क्या मतलब है ? मतलब साफ है कि यह सरकार नहीं चाहती के प्राइवेट स्कूलों से लाखों करोड़ों पेरेंट्स को आजादी मिले ।
इस वीडियो को जरुर देखें और आगे भी शेयर करें ताकि सरकार की मंशा की जानकारी लोगों तक पहुंचे।
अगर यह बच्ची होंसले के साथ संघर्ष कर सकती है तो फिर आप क्यों नही ?
धन्यवाद
ParentsAssociation Regd Bathinda
सुनाम का एक प्राईवेट स्कूल पेरंट्स की लूट बंद करे।

अपनी खूद स्कूल की दूकान खुला कर एक बडा स्कूल किताबे व ड्रेस बेचनी बंद करे। यह न केवल CBSE की तय गाईड लाईन का उल्लंघन है बल्कि जिला प्रोजेक्ट डायरेक्टर, सर्व शिक्षा अभियान संगरूर की और से 20-3-2016 को जारी आदेशों का उल्लंघन है और स्कूल की मान्यता भी रद्द हो सकती है।

स्कूल अपनी कार्यशैली बदले नही तो संघर्ष का रास्ता अपनाना होगा।

जागो पेरंटस जागो

इस मैसेज को DC Sangrur, ADC Sangrur, DEO Primary, DEO Sec. के साथ Chief Secretary Punjab को कार्यवाही के लिए भेजा जा रहा है।