Thursday, August 31, 2017

मक्का की अधिक उपज के लिए किसान भाई करें यह उपाय

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मक्का की अधिक उपज के लिए किसान भाई करें यह उपाय

मक्का में किस उर्वरक की आवश्यकता होती है और किस तरह उसका प्रयोग किया जाये?

मात्रा:

मक्का की भरपूर उपज लेने के लिय संतुलित उर्वरकों क प्रयोग आवश्यक है। अतः कृषकों को मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करना चाहियें। यदि किसी कारणवंश मृदा परीक्षण न हुआ हो तो देर से पकने वाली संकर एवं संकुल प्रजातियां के लिये क्रमशः १२०: ६०:३०:३० नेत्रजन फास्फोरस एवं पोटाश  प्रति हेक्टर प्रयोग करना चाहियें। गोबर की खाद १० टन प्रति हे. प्रयोग करने पर २५% नत्रजन की मात्रा कम कर देनी चाहिये।

विधि:

बुवाई के एक तिहाई नत्रजन, पूर्ण फास्फोरस तथा पोटाश कूड़ों  में बीज के नीचे डालना चाहिये। अवशेष नत्रजन  दो बार मे बराबर-२ मात्रा में टापड्रेसिंग के रूप में करें। पहली टापड्रेसिंग बोने के २५-३० दिन बाद (निराई के तुरन्त बाद) एवं दूसरी नर मंजरी निकलते समय करें। यह अवस्था संकर मक्का मे बुवाई के ५०-६० दिन बाद एवं संकुल में ४५-५० दिन बाद आती है।

खरपतवार नियंत्रण

मक्का की खेती में निराई गुडाई का अधिक महत्व है। निराई-गुडाई द्वारा खरपतवार नियंत्रण के साथ ही आक्सीजन का संचार होता है। जिससे वह दूर तक फैल कर भोज्य पदार्थ का एकत्र कर पौधों को देती है। पहली निराई जमाव के १५ दिन बाद कर देना चाहिये। और दूसरी नियंत्रण ३५-४० दिन बाद करनी चाहियें।
मक्का में खरपतवारों को नष्ट करने के लिये एट्रजीन (५०%- डब्लू.पी. १.५-२.० किग्रा.प्रति हें घुलनशील चूर्ण का ७००-८०० लीटर पानी में घोलकर बुवाई के दूसरे या तीसरे दिन अंकुरण से पूर्व प्रयोग करने से खरपतवार नष्ट हो जाते हे। एलाक्लोर ५० ई.सी. ४ से ५ लीटर बुवाई के तुरन्त बाद जमाव के पूर्व ७००-८०० लीटर पानी में मिलाकर भी प्रयोग किया जा सकता है। यदि मक्का के बाद की खेती करनी हो तो एट्राजीन का प्रयोग न करे।

मक्का में साधारणतया कोन से रोग लगते हैं, उनकी पहचान किस प्रकार करें एवं रोग का उपचार किस प्रकार करें?

तुलासिता रोग:

पहचान:

इस रोग में पत्तियों पर पीली धारियां पड़ जाती है। पत्तियों के नीचे की सतह पर सफेद रूई के समान फफूंदी दिखाई देती है। ये ध्ब्बे बाद में गहरे अथवा लाल भूरे पड़ जाते है। रोगी पौधो में भुट्‌टे कम बनते है। या बनते ही नही है।

उपचार:

इनकी रोकथाम हेतु जिंक मैग्नीज कार्बमेट या जीरम ८० प्रतिशत २ किलोग्राम अथवा जीरम २७ प्रतिशत के ३ ली०/हे० की दर से द्दिड़काव आवश्यक पानी की मात्रा में घोलकर करना चाहिये।

पत्तियों का झुलसा रोग:

पहचान

इस रोग में पत्तियों पर बड़े लम्बे अथवा कुद्द अण्डाकार भूरे रंग के धब्बे पड़ जाते है। रोग के उग्र होने पर पत्तियों झुलस कर सूख जाती है।

उपचार:

इसकी रोकथाम हेतु जिनेब या जिंक मैगनीज कार्बमेट २ किलोग्राम अथवा जीरम ८० प्रतिशत २ ली० अथवा जीरम २७ प्रतिशत ३ लीटर/हे० की दर से  छिड़काव करना चाहिये।
सूत्र कृमियों की रोकथाम के लिये गर्मी की गहरी जुताई करें एवं बुवाई के एम सप्ताह पूर्व खेत में १० किग्रा० फोरट १० जी. फैलाकर मिला दें।

तना सडन

पहचान

यह रोग अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में लगता है। इसमें तने की पोरियों पर जलीय धब्बे दिखाई देते है। जो शीघ्र ही सड़ने लगते है। और उससे दुर्गन्ध आती है। पत्तियों पीली पड़कर सूख जाती है।

उपचार

रोग दिखाई देने पर १५ ग्राम स्ट्रेप्टोसाइक्लीन अथवा ६० ग्राम एग्रोमाइसीन प्रति हे० की दर से छिड़काव  करने से अधिक लाभ होता है।

मक्का में लगने वाले कीट कोन-कोन से हैं एवं उनपर नियंत्रण किस प्रकार किया जाये ?

 तना छेद्क:

पहचान

इस कीट की सुड़ियाँ  तनों में द्देद करके अन्दर ही खाती रहती है। जिससे मृतभोग बनता है। और हवा चलने पर बीच से टूट जाता है।

उपचार

  • १. इसकी रोकथाम हेतु बुवाई के २० से २५ दिन बाद लिन्डेल ६ प्रतिशत गे्रन्यूल २० किलोग्राम अथवा कार्बोयूरान ३ प्रतिशत ग्रेन्यूल २० किलोग्राम अथवा (लिन्डेल + कार्बराइल) (सेवीडाल ४.४ जी.) २५.०० किलोग्राम प्रति हेक्टर की दर से प्रयोग करना चाहिये।
  • २. बुवाई के १५-२०  दिन  के बाद निम्न में से किसी एक रसायन का छिड़काव  करना चाहियें ।
  1. इमिडाक्लोप्रिड ६ मिली./किग्रा. बीज की दर से बीज शोधन करें ।
  2. कार्बेरिल ५०% घुलनशील चूर्ण १.५ किग्रा./ हे. ।
  3. फेनिट्रोथियांन ५० ई .सी. ५००-७०० मिली./हे. ।
  4. क्यूनालफास २५ ई.सी. २ लीटर/हे.।
  5. इन्डोसल्फान ३५ ई.सी. १.५ लीटर/हे.।
  6. ट्रइकोग्रामा परजीवी ५०००० प्रति हे. की दर से खेत मे अंकुरण के ८ दिन बाद ५-६ दिन के अंतर पर दुहरायें, खेत में द्दोड़ना चाहिये।

पत्ती लपेटक कीट

पहचान:

इस कीट की सुड़ियाँ  पत्ती के दोनो किनारों को रेशम जैसे सूत से लपेटकर अंदर से खाती है।

उपचार:

उपयुक्त कीटनाशक रसायनों में  से किसी एक का प्रयोग करना करें ।
  1. इमिडाक्लोप्रिड ६ मिली./किग्रा. बीज की दर से बीज शोधन करें ।
  2. कार्बेरिल ५०% घुलनशील चूर्ण १.५ किग्रा./ हे. ।
  3. फेनिट्रोथियांन ५० ई .सी. ५००-७०० मिली./हे. ।
  4. क्यूनालफास २५ ई.सी. २ लीटर/हे.।

टिड्‌डा :

पहचान:

इस कीट के शिशु तथा प्रौढ दोनो ही पत्तियों को खाकर हानि पहुंचाते है।

उपचारः

इसकी रोकथाम हेतु मिथाइल पैराथियान २ प्रतिशत २०-२५ किलोग्राम का बुरकाव प्रति हेक्टर करना चाहियें।

 भुड़ली (कमला कीट):

पहचान:

इस कीट की गिडारे पत्तियों को बहुत तेजी से खाती है। और फसल को काफी हानि पहुचाती है। इसके शरीर पर रोये होते है।

उपचार:

इसकी रोकथाम हेतु निम्न में से किसी एक रसायन का बुरकाव या छिड़काव  प्रति हेक्टर करना चाहियें।

  1. मिथाइल पैराथियान २ प्रतिशत चूर्ण २० किलोग्राम।
  2. इन्डोसल्फान ४ प्रतिशत धूल २० किलोग्राम।
  3. क्यूनालफास १.५ प्रतिशत धूल २० किलोग्राम।
  4. इन्डोसल्फान ३५ ई.सी. १.२५ लीटर।
  5. डाइक्लोरवास ७० ई.सी. ६५० मि. लीटर।
  6. क्लोरपायरीफास २० ई.सी. १.० लीटर

Tuesday, August 29, 2017

किसान क्रेडिट कार्ड पर किसान को ऋण का भुगतान किस प्रकार करना होता है, उस राशि पर लगने वाला ब्याज कीतना होगा जानें

किसान क्रेडिट कार्ड पर किसान को ऋण का भुगतान किस प्रकार करना होता है, उस राशि पर लगने वाला ब्याज कीतना होगा जानें

देश के सभी राज्यों किसान कृषि कार्य के लिए लोन लेते है , यह लोन वार्षिक , अर्धवार्षिक या फसल के अनुसार लेते है | जिसे सरकारी या राष्ट्रीय बैक किसान को लोन देता है | लेकिन ज्यादा तर किसान को यह मालूम नहीं है की लोन पर ब्याज किस आधार पर लिया जाता है | आज आप सभी किसान भाई को लोन और उस पर ब्याज के बारे में पूरी जानकारी दिया जायेगा |
मान लेते है की देश के किसी भी राज्य के कोई भी किसान किसान क्रेडिट कार्ड से 5 लाख रूपये का कर्ज किसी भी राष्ट्रीय बैंक से लेता है | तो अब यह जानना होगा की वह किसान एक साल में कितना रुपया बैंक को लौटना पड़ेगा | इस पर किसान को दो तरह का ब्याज लगेगा | एक 3 लाख रूपये तक के लोन पर 7 प्रतिशत तथा 2 लाख लोन पर 9 प्रतिशत का ब्याज लगेगा | अगर वह किसान जिस तारीख से लोन लिया है अगर उसी तारीख को लोन वापस कर देता है तो 3 लाख रूपये पर 3 प्रतिशत का सब्सिडी मिलेगा | बाकि 2 लाख रूपये पर 9 प्रतिशत का ही ब्याज लगेगा |
अब यह जानना होगा की किसान को एक साल में कितना रुपया बैंक को वापस करना होगा | जैसा की ऊपर बताया की एक साल में लौटने पर 3 लाख रूपये पर 3 प्रतिशत का सब्सिडी मिलेगा | इसका मतलब यह हुआ की 3 लाख रूपये पर 4 प्रतिशत का ब्याज लगेगा | 12000 रुपया 3 लाख पर एक साल का ब्याज होगा | बचे हुए 2 लाख पर 9 प्रतिशत का ब्याज लगेगा | 18000 रुपया 2 लाख रूपये का ब्याज होगा | कुल एक साल में किसान को ब्याज सहित रुपया होगा

(3 लाख लोन + 12000 ब्याज ) + (2 लाख लोन + 18000 ब्याज ) = 5 लाख 30 हजार रुपया |

इसके बाद केंद्र सरकार ने 2016 में प्रधानमंत्री फसल बीमा लागू किया था , जिसमें यह नियम है की देश के कोई भी किसान अगर किसान क्रेडिट कार्ड या किसी और माध्यम से भी फसल के लिए कर्ज लेता है तो लिए हुए कर्ज का 2 प्रतिशत प्रधान मंत्री फसल बीमा के लिए काटा जायेगा |
इसका मतलब यह हुआ की किसान ने 5 लाख रूपये का कर्ज लिया था तो उसका राशि का 2 प्रतिशत काट लिया जायेगा | 5 लाख रूपये का 2 प्रतिशत 10,000 रुपया होता है | इसमें आप को ध्यान देने वाली बात यह है की किसान लोन तो 5 लाख रूपये का लेगा लेकिन उसे 2 प्रतिशत काट कर 4 लाख 90,000 रुपया ही मिलेगा | लेकिन ब्याज 5 लाख रूपये पर लगेगा |तो किसान को एक साल में 5 लाख रूपये लोन लेने पर 4 लाख 90,000 रुपया मिलेगा और 5 लाख 30,000 रुपया एक साल में लौटान पड़ेगा |

अब यह जानते है की किसान ने किसी कारण से एक साल में बैंक को पैसा नहीं लौटा पाया तो किसान पर कितना कर्ज रहेगा ?

अगर किसान 5 लाख रुपया लेकर किसी कारण से एक साल में कर्ज नहीं लौटा पाया तो किसान को मिलने वाला 3 प्रतिशत की सब्सिडी नहीं मिलेगी | इसका मतलब यह हुआ की 3 लाख पर 7 प्रतिशत का ही ब्याज चलेगा | किसान जितना देर करेगा किसान पर बोझ उतना ही बढेगा |
यह योजना पिछले 10 साल से लागू है प्रतेक साल मार्च महीने में इसकी समय पूरा हो जाता है , सरकार प्रतेक साल इस योजना को अगले साल के लिए बढ़ा देती है | इस वर्ष देर से लेकिन 14 जून को इस योजना को वर्ष 2017 – 18 के लिए लागू किया गया है | इसके लिए केंद्र सरकार 20339 कड़ोर रुपया स्वीकृत किया है | जिसका आप लोग लाभ उठा सकते है |
अब आप सभी किसान भाई अगर कर्ज लिए हैं या लेने के बारे में सोच रहे हैं तो अपनी कर्ज पर लगने वाला ब्याज को आप इस नियम से जोड़ सकते है |

Monday, August 28, 2017

राजस्व विभाग द्वारा कानून की अवहेलना करते हुवे आम नागरिको का शोषण

सन्दर्भ संख्या : ट्रेप /८३८ -८४९ x २ दिनांक २८ अगस्त २०१७
माननीय श्री योगी आदित्य नाथ जी ,
मुख्य मंत्री उत्तर प्रदेश , लखनऊ
विषय : राजस्व विभाग द्वारा कानून की अवहेलना करते हुवे आम नागरिको का शोषण
महोदय ,
आम नागरिक हो या किसान सभी के जमीन के विवाद में राजस्व विभाग की अहम् भूमिका होती है और दो पक्षों में हुवे भूमि विवाद में राजस्व विभाग द्वारा की गई भूमि के नाप को ही प्रमाणिक माना जाता है I भूमि को नापने के लिए राजस्व विभाग के अधिकारी ( लेखपाल / कानूनगो ) एक विशेष लोहे की चेन का उपयोग करते है , जिसे प्रचलन की भाषा में जरीब ( सर्वेक्षण चेन / measuring chain ) कहते है I
महोदय , उत्तर प्रदेश शासन के उपभोक्ता संरक्षण एवम बाट - माप की अधिसूचना संख्या 331/84-1-2011-23 बा मा - 2010 दिनांक 01 अप्रैल 2011 की अनुसूची - 9 , नियम 17(1) के अनुसार सर्वेक्षण चेन का वार्षिक सत्यापन एवम स्टाम्पन आवश्यक है , जिस हेतु सरकार ने शुल्क भी तय कर रखा है I
महोदय , हमें प्राप्त एक सूचना के अनुसार राज्य भर में जमीन की पैमाइश में काफी गड़बड़ी हो रही है , इसे ध्यान में रखकर सूचना कानून में हमने २ बार सूचनाए मांगी जिसपर तहसीलदार कोल , अलीगढ के द्वारा दिए गए जबाब 148 दिनांक 25-07-17 एवम 149 दिनांक 26-07-17 ( दोनों प्रतिलिपिया संलग्न ) I
दिए गए जबाब के अनुसार उनके विभाग के पास जमीन पैमाइश हेतु कितनी जरीब है उसका कोई भी रिकार्ड उपलब्ध नहीं I उनके अनुसार उनके पास जो जरीबे है वो सब स्वयं प्रमाणित है जिसे किसी तरह से सत्यापन एवम स्टाम्पन की आवश्यकता नहीं I
महोदय , आज के भ्रष्टाचार के युग में जरीब ( सर्वेक्षण चेन / measuring chain ) के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ से इनकार नहीं किया जा सकता , विशेषकर जब नियमानुसार इनकी प्रमाणिकता हेतु सत्यापन एवम स्टाम्पन ही कभी नहीं किया जाता है I -
महोदय , यही स्थिति सम्पूर्ण प्रदेश में में भी हो सकती है और कही भी किसी भी जिले में जरिबो की वार्षिक सत्यापन एवम स्टाम्पन , बाट-माप विभाग द्वारा नहीं करवाई जाती I
हमारा अनुभव है कि जब भी राजस्व विभाग से सम्बंधित कोई सुझाव / सुधार या शिकायत इनके उच्चतम विभाग बोर्ड आफ रेवेन्यु को भेजा जाता है वह यथा-स्थिति में सबसे निम्नतम ईकाई तहसील / लेखपाल को क्रमवार अग्रेसित होता जाता है , और अंत में दाखिल दफ्तर हो जाता है I जिले के शीर्ष अधिकारी शायद आम जनता के सुझाव या किसी शिकायत को न तो स्वीकार करते है न ही सुनना पसंद करते है I
अतः हमारा आपसे अनुरोध है कि इस विषय को गम्भीरता से लेते हुवे आवश्यक निर्देश जारी करते हुवे सम्पूर्ण मामले की जांच करवाते हुवे दोषी अधिकारियों के खिलाफ भी कार्यवाही करने की कृपा करे I
धन्यवाद सहित
भवदीय ,
बिमल कुमार खेमानी , संरक्षक
ई विक्रम सिंह , अध्यक्ष , ट्रेप ग्रुप
प्रतिलिपि :
1. श्री अतुल गर्ग ,
राज्य मंत्री , खाद्य एवम रसद विभाग , उत्तरप्रदेश शासन , लखनऊ
2. मुख्य सचिव , उत्तरप्रदेश शासन , लखनऊ
3. अध्यक्ष , राजस्व परिषद् , उत्तरप्रदेश शासन , लखनऊ
4. जिलाधिकारी , अलीगढ
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Sunday, August 27, 2017

अब गूगल मैप बताएगा टॉयलेट का रास्ता--

अब गूगल मैप बताएगा टॉयलेट का रास्ता--
2 अक्टूबर से देश के 85 शहरों में मौजूद शौचालयों की लोकेशन गूगल मैप पर डाल दी जाएगी। इसके साथ ही एक ऐप भी लॉन्च की जाएगी जिसमें आसपास शौचालय ढूंढे जा सकेगें।
बाजार और भीड़भाड़ वाले इलाकों के अलावा सड़कों पर लोग टॉयलेट ढूंढ़ने के लिए परेशान होते हैं। सबसे अधिक परेशानी महिलाओं को होती है।
मिशन टॉयलेट लोकेटर के तहत अभी आगरा, अजमेर, अहमदाबाद, भिलाई नगर, भुवनेश्वर, धानबाद, ग्रेटर मुंबई, गुवाहटी, जयपुर, जम्मू,कोच्चि, विजयवाड़ा समेत ग्रेटर बैंगलूरू को शामिल किया गया है।
आप रास्ते में कहीं जा रहे हैं और अचानक टॉयलेट लगे या पेट खराब हो जाए, तो क्या करेंगे। जाहिर है स्थानीय लोगों से सार्वजनिक शौचालय के बारे में पूछेंगे। इसके अलावा कोई विकल्प भी नहीं होता है। मगर, अब आपको आसानी से पता चल जाएगा कि आप जहां हैं, वहां से सबसे पास कौन सा शौचालय है। भारत सरकार ने एक पहल शुरू की है। इसका नाम ‘मिशन टॉयलेट लोकेटर’ है। इसके तहत जल्द ही केन्द्र सरकार गूगल मैप पर सार्वजनिक शौचालयों की लोकेशन डालने जा रही है।
2 अक्टूबर से देश के 85 शहरों में मौजूद शौचालयों की लोकेशन गूगल मैप पर डाल दी जाएगी। इसके साथ ही एक ऐप भी लॉन्च की जाएगी जिसमें आसपास शौचालय ढूंढे जा सकेगें। इसके लिए नगर निगम सभी टॉयलेट की लोकेशन गूगल मैप पर अपडेट करवाने जा रहा है। ऐप पर पब्लिक टॉयलेट में सफाई की रेटिंग की जानकारी के साथ फीडबैक देने की भी सुविधा होगी।
दिल्ली में योजना लॉन्च-
इस फीचर को सबसे पहले दिल्ली में 23 अगस्त को लॉन्च कर दिया गया है, बाकी शहरों में काम चल रहा है। ये कदम दिल्ली को साफ-सुथरा बनाने और सार्वजनिक जगहों को शौच मुक्त बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। गूगल मैप की मदद से अब दिल्ली में रहने वाले या टूर पर आने वाले लोग 331 पब्लिक टॉयलेट को ढूंढ सकते हैं। यूजर्स को केवल गूगल मैप में पब्लिक टॉयलेट या टॉयलेट लिखकर सर्च करना होगा। इसके बाद गूगल मैप यूजर्स को उनके आसपास मौजूद सारे टॉयलेट का पता बता देगा।
'स्वच्छ भारत टॉयलेट लोकेटर' ऐप के जरिए अभी शहर के सिर्फ नौ पब्लिक टॉयलेट गूगल मैप पर दिखते हैं। बाकी पब्लिक टॉयलेट के लोकेशन की कोई जानकारी गूगल मैप पर नहीं है, जबकि शहर में इस वक्त 331 पब्लिक और कम्युनिटी टॉयलेट हैं। इस कारण बाजार और भीड़भाड़ वाले इलाकों के अलावा सड़कों पर लोग टॉयलेट ढूंढ़ने के लिए परेशान होते हैं। सबसे अधिक परेशानी महिलाओं को होती है। योजना के तहत गूगल मैप पर सभी पब्लिक टॉयलेट की लोकेशन के साथ इनके खुलने और बंद होने की जानकारी भी शेयर की जाएगी। इस बीच एनडीएमसी ने अपना नया ऐप एनडीएमसी 311 लॉन्च किया है। इसके जरिये यूजर्स विभिन्न नागरिक सेवाओं के बारे में जान सकते हैं और सबसे पास के 'स्मार्ट टॉयलेट' का पता लगा सकते हैं।
सुविधाएं होंगी और भी बेहतर-
एनडीएमसी अध्यक्ष नरेश कुमार के मुताबिक, ऐसे स्मार्ट शौचालयों में एटीएम, रूफटॉप सौर पैनल्स, सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन के साथ ही कई अन्य सुविधाएं मिल सकेंगी। दिल्ली-एनसीआर में एनडीएमसी द्वारा ऐसे 109 स्मार्ट टॉयलेट का निर्माण किया गया है। एक तरह से एनडीएमसी यात्रियों और आम जनता के लिए शौचालयों को रिसोर्स हब में बदलने की कोशिश कर रहा है। दिल्ली के शौचालयों को गूगल मैप में अपलोड कर दिया गया है, ताकी लोग आसानी से इन्हें खोज सकें।
इन शौचालयों को एनडीएमसी के मोबाइल ऐप 'NDMC311' में भी सर्च किया जा सकता है। तीन महीने के भीतर 41 और सार्वजनिक शौचालयों को एनडीएमसी द्वारा गूगल मैप में अपलोड किया जाएगा। लोग शौचालयों को उपयोग कर अपने अनुभव भी साझा कर सकते हैं। लोगों के अनुभवों के आधार पर एनडीएमसी शौचालयों की बुनियादी सुविधाओं में सुधार करेगी और जरुरत के मुताबिक सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी। ये कदम दिल्ली को साफ-सुथरा बनाने के लिए और शौचमुक्त करने के लिए उठाया गया है।
इन शहरों के टॉयलेट आएंगे मैप पर-
मिशन टॉयलेट लोकेटर के तहत अभी आगरा, अजमेर, अहमदाबाद, भिलाई नगर, भुवनेश्वर, धानबाद, ग्रेटर मुंबई, गुवाहटी, जयपुर, जम्मू,कोच्चि, विजयवाड़ा समेत ग्रेटर बैंगलूरू को शामिल किया गया है। इस पहल की शुरूआत सबसे पहले दिल्ली के नेशनल कैपिटल रीजन में की गई थी। एनसीआर में यह पता चला कि रोजाना करीब 50-60 लोग टॉयलेट लोकेटर ऐप का इस्तेमाल करते हैं। इसके साथ ही टॉयलेट की कंडीशन को भी रेटिंग देते हैं। अभी तक कुल 5,162 शौचालय को मैप पर डाल दिया गया है। Source- 

Tuesday, August 22, 2017

राज्य सूचना आयुक्त श्री अरविन्द सिंह बिस्ट को उनके पद से हटा कर लखनऊ विकास प्राधिकरण, लखनऊ मे हुए भ्रस्टाचार में उनकी संलिप्प्ता एवं अर्जित संपत्तियों की जाँच कराया जाना

राज्य सूचना आयुक्त श्री अरविन्द सिंह बिस्ट को उनके पद से हटा कर लखनऊ विकास प्राधिकरण, लखनऊ मे हुए भ्रस्टाचार में उनकी संलिप्प्ता एवं अर्जित संपत्तियों की जाँच कराया जाना
Ashok Goel <akgoel1954@gmail.com>
अटैचमेंट1:53 pm (31 मिनट पहले)
cmup
महोदय
उक्त सम्बन्ध में लखनऊ से प्रकाशित समाचार पत्रों में LDA की उपसचिव, अम्बी बिस्ट द्वारा फर्जी आवंटन के जरिये LDA के एक बड़े भूखण्ड अपने पति राज्य सूचना आयुक्त अरविन्द सिंह बिस्ट के नाम किये जाने का मामला प्रकाशित हुए
अतः आपसे अनुरोध है कि-
1-उक्त भ्रस्टाचार चुकि उच्चाधिकारियो से जुड़ा हैं इसलिए प्रश्नगत भू-खण्डों की पत्रावलियां गायब किये जाने या नस्ट किये जाने की संभावना से इनकार नही किया जा सकता है इसलिये उक्त भ्रस्टाचार से संबधित समस्त पत्रावलियां सुरक्षित करायी जाये ताकि वे किसी भी प्रकार नस्ट न हो सके
2-उक्त सूचना आयुक्त द्वारा एक संवैधानिक पद पर बैठ कर जालसाजी के कृत्य से अपने नाम भूखण्ड कराना कदाचार की श्रेणी में आता है अतः RTI ACT की धारा 17 के अधीन उक्त सूचना आयुक्त श्री बिस्ट के विरुद्ध आवश्यक जाँच एवं कार्यवाही के लिये ये मामला राजपाल उत्तर प्रदेश को संदर्भित किया जाये और माननीय सर्वोच्च न्यायालय को भी
3-उक्त सूचना आयुक्त को उसके पद से हटाने के बाद ही उक्त प्रकरण की निष्पक्ष जाँच संभव प्रतीत होती है इसलिए उक्त सूचना आयुक्त को उसके पद से हटाया जाये
4-उक्त श्री अम्बी बिस्ट LDA के सूचना सम्बन्धी मामले देखती है और उक्त सूचना आयुक्त श्री बिस्ट आयोग में LDA के विरुद्ध आयोग में की गयी अपीलों व शिकायतों को सुनते है और बिना विभाग के विरुद्ध दण्ड अधिरोपित किये और मांगी गयी सूचना दिलाये बिना ही नितारित करते का रहे हैं इसलिये आयोग के उस कार्य वितरण की जाँच करायी जाये जिसके तहत उक्त सूचना आयुक्त श्री बिस्ट को प्राधिकरण के सूचना सम्बन्धी दायित्व श्री बिस्ट को सौपा जाया है और श्री बिस्ट द्वारा द्वारा LDA के विरुद्ध अब तक सुने सभी मामलों की जाँच करायी जाये और जारी आदेशों की समीक्षा करायी जाये कि उनके आदेश किस विधि मुखरित है और RTI एक्ट के दायरे में आते है
5-उक्त सूचना आयुक्त द्वारा किस आदेश से प्रदेश के किन किन शहरों में कितने कैंप लगाये हैं और इस सुनवाइयों में अधिकारिओं से मिली भगत करके कितने नागरिकों से जबरन धमकी दे कर ये लिखवाया है कि उन्हें सूचना मिल गयी है जबकि वास्तव में उन्हें सूचना मिली ही न्ह्ही है और इस एवज में श्री बिस्ट ने उन अधिकारिओं से कितना और किस प्रकार का लाभ अर्जित किया है
6-उक्त लाभ के कितने अंश से उन्होंने भू संपत्ति अर्जित की है ?
कृपया उक्त शिकायत को दर्ज कर, आवश्यक निष्पक्ष जाँच और कार्यवाही आदेशित की जाये और कृत कार्यवाही से मुझे भी अवगत कराया जाये
7-उक्त आयुक्त के सम्बन्ध में आवेदित सूचना दिलाई जाये
संलग्नक -उपरोक्तानुसार का संज्ञान भी लिया जाये
--
भवदीय,

(अशोक कुमार गोयल)
अध्यक्ष
सूचना का अधिकार कार्यकर्ता वेलफेयर एसोसिएशन,
पता :- गणेशपुर - रहमानपुर ,थाना चिनहट, लखनऊ -226028
E-Mail :- akgoel1954@gmail.com
मोबाईल :- 8009444448
Ashok Goel <akgoel1954@gmail.com>
2:04 pm (23 मिनट पहले)
Governor
इस आशय से प्रेषित है कि राज्य सूचना आयुक्त अरविन्द सिंह बिस्ट द्वारा RTI ACT की धारा 17(e) के विपरीत आचरण का संज्ञान लिया जाये और उन्हें सूचना आयुक्त के पद से हटाया जाये तथा उक्त साबित कदाचार के आधार पर सर्वोच्च न्यायालय को जाँच हेतु ये मामला संदर्भित किया जाये और संदर्भित पत्रावलियों की समुचित सुरक्षा का प्रबंध किया जाये
उक्त शिकायत दर्ज कर प्राप्त्गी दी जाये
---------- अग्रेषित संदेश ----------
प्रेषक: Ashok Goel <akgoel1954@gmail.com>
दिनांक: 22 अगस्त 2017 को 1:53 pm
विषय: राज्य सूचना आयुक्त श्री अरविन्द सिंह बिस्ट को उनके पद से हटा कर लखनऊ विकास प्राधिकरण, लखनऊ मे हुए भ्रस्टाचार में उनकी संलिप्प्ता एवं अर्जित संपत्तियों की जाँच कराया जाना
प्रति: cmup <cmup@up.nic.in>
Ashok Goel <akgoel1954@gmail.com>
2:06 pm (21 मिनट पहले)
SCI
सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित है
कृत कार्यवाही से मुझे भी अवगत कराया

Saturday, August 19, 2017

Zero Standard of Rural Postal Services in India

Subject :- Zero Standard of Rural Postal Services in India. As you know, India's 80% of population live in villages. But the postal services in rural areas quite zero standard. It is such that a post offices in an urban area works for full day, but on the other hand a post office in a rural area works for only three hours, despite the fact that two or three additional non-post office villages are attached with this rural post office. Every City or urban area has a post office but not every village has a post office. Urban post offices are separate and have well furnished buildings but rural post offices are premised in private homes. The urban area postal employees are permanent, but the rural area postal employees are temporary/part time. It is such that a post offices in an urban area all Business of Small Savings Paid commission to Agent, but on the other hand a post office in a rural area all Business of Small Savings without Paid any commission. Bonus of PLI Big and Bonus of RPLI Low. Salary of GDS App. 6000- PM. This kind of disparity with the rural folk is unfair and unjust. During after independence, the department of post has registered tremendous progress in rural areas through huge network or extra departmental Post offices. In the rural areas which represents a population ratio of 74.20% the postal development is much more phenomenal. A total number of 2.7 lacks of Gramin Dak Sevaks are taking care of the postal needs of the population through 1,27,183 branch Post Offices without buildings. This represents 89.42% of total connectivity whereas the urban connectivity is about 10.58%. The statistical data for the past decades goes to demonstrate the vast growth of Rural Post Office and GDS staff. It is GDS who are actually running the country's postal services. ** It is illegal and extremely unfair labour practice to consider main workforce of the Postal Department providing 90% of Postal connectivity as "Extra Departmental". The whole system of maintaining lakhs of workers as Extra Departmental employees is itself illegal. Since overwhelming part of the postal services are run by them, almost 90%, they should immediately be departmentalized/made integral part of the Department and paid all benefits admissible to regular employees. They indeed are the real Postal workforce in the country running largest and one of the most efficient Postal services in the world. It is unjust to consider them as class apart from the regular employees. Grant Status/Regularization as government servant to GDS employees as recommended by Justic Talwar and many Committees. The Hon’ble Supreme Court of India in its land mark judgement held that the Extra Departmental agents (now GDS) are holders of civil posts. **For promotion from GDSs to LGOs & MTSs age limit is 50 year and for promotion form GDSs to PA/SA is only 30 year age limit. Which is unfair and injustice to GDSs. Isn't it a discrimination, injustice, high-hundeness. Apart from postal department, other different departments of Centre and other States have also recruited permanent employee in rural areas and these rural employees given promotion along with special kind of facilities .Besides there are other facilities like rural area allowance, concession in merit to rural children , preference in promotion or jobs. The postal department has recruited no permanent employees in rural area. Like other departments, the postal department should also give opportunities of availing facilities and promotions to its rural employees so that the life standard of the GDSs may improve. Here his only fault is that he has served in rural area. Unfortunately, most of the facilities granted by the department to the departmental employees are denied to these low paid poor employees where as the duties, services, functions, risks and responsibilities of the GDS employees similar and equal to those of departmental employees. If we want to revive our rural postal services, The Government of India must make serious efforts. As per provisions in the Constitution, the rural people should also be provided with all some equal rights as urban people enjoy. Department of posts long time services to urban. now turn is rural . It is therefore requested to the implement fully day postal services and modern facilities in rural areas. thanking you in anticipation.See Translation

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